भारतीय हॉकी : उम्मीद की किरण

जूनियर लेवेल पर भारत एशिया कप चैंपियन बन चुका है, जिससे साफ है कि एशिया महाद्वीप के स्तर पर भारत के लिए आनेवाला कल भी सुहावना है. यहां से भारत को हॉकी में ग्लोबल ताकत बनने की दिशा में बढ़ना है. सुल्तान जौहर कप में ब्रिटेन के बाद दूसरे स्थान पर आने की वजह से […]
जूनियर लेवेल पर भारत एशिया कप चैंपियन बन चुका है, जिससे साफ है कि एशिया महाद्वीप के स्तर पर भारत के लिए आनेवाला कल भी सुहावना है. यहां से भारत को हॉकी में ग्लोबल ताकत बनने की दिशा में बढ़ना है.
सुल्तान जौहर कप में ब्रिटेन के बाद दूसरे स्थान पर आने की वजह से हमारी टीम भूखी थी. लड़कों ने जबरदस्त संयम और जुनून का परिचय दिया. सुल्तान जौहर कप के बाद तो हम पोडियम फिनिश के लिए बेकरार थे और एशिया कप फाइनल मैच इस वजह से लाजवाब रहा. हमें अब आगे देखना है और अपने प्रदर्शन को बरकरार रखना है. जूनियर एशिया कप फाइनल में पाकिस्तान को 6-2 से हराने के बाद टीम इंडिया के मुख्य कोच हरिंदर सिंह का बयान में फौरी तौर पर इस जीत के दो मायने थे. पहला, भारत ने अपने चिर-विरोधी पाकिस्तान को अपने पारंपरिक खेल हॉकी में हराया और दूसरा, जूनियर एशिया कप एक प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है. बावजूद इसके, इस खबर को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया में एक सन्नाटा पसरा रहा. ऐसे में सवाल है कि यह सन्नाटा क्या भारतीय खेलों में हॉकी की दशा-दिशा को लेकर परिचायक था या फिर, अंधेरे के बाद सुबह की किरण आयेगी?
हरमप्रीत सिंह ने टूर्नामेंट में सबसे अधिक 15 गोल कर एक नयी आस जगायी, तो सबसे बेहतरीन गोल कीपर का अवॉर्ड जीतनेवाले विकास धाइया आनेवाले दिनों में सीनियर टीम की रीढ़ साबित हो सकते हैं. इन दोनों के अलावा बाकी खिलाड़ियों के प्रदर्शन से साफ है कि टैलेंट पूल में कोई कमी नहीं आयी है. अगर चुनौती है, तो दो अहम मोर्चे पर. पहला, इस टैलेंट को तरासे जाने के लिए एक सशक्त नीति तैयार हो और दूसरा, अधिकतर खिलाड़ी मूलतः दो क्षेत्रों से आ रहे हैं. ऐसे में यह बहुत ही जरूरी है कि टैलेंट पूल का विस्तार हो. जहां हॉकी के सभी पारंपरिक गढ़ों को और दुरुस्त किये जाने की जरूरत है, वहीं नये टैलेंट बेस को खोजना भी जरूरी है, ताकि किसी दूसरे धनराज पिल्लै को यह न कहना पड़े कि अगर मेरा बेटा हॉकी स्टिक पकड़ने की बात करता है, तो मैं उसे तोड़ कर फेंक दूंगा. आज का हरमप्रीत सिंह कल का धनराज बने और अपने कैरियर के अंतिम पड़ाव में यह फख्र से कह सके कि मैं अपने बेटे को हॉकी स्टिक थामने को कहूंगा. यह तभी होगा जब हॉकी खिलाड़ी हुनर, रुतबे और पैसे में युवा खिलाड़ियों का रोल मॉडल बनेंगे.
2008 में भारत ने हॉकी मे शिखर से सिफर को देखा, जब टीम इंडिया बीजिंग ओलिंपिक्स के लिए क्वाॅलिफाइ नहीं कर सकी. 2012 लंडन ओलिंपिक्स में भारत ने क्वाॅलिफाइ जरूर किया, लेकिन वह आखिरी पोजिशन पर रहा. तब से अब तक टीम ने वापस पटरी पर आने की दिशा में गति पायी है. हाल में जूनियर टीम सुल्तान जौहर कप में दूसरे नंबर पर रही, एशिया कप में चैंपियन रही और सीनियर हॉकी टीम एशिया के स्तर पर अपनी बादशाहत को कायम करने में कारगर रही है. रियो ओलिंपिक्स 2016 के लिए क्वाॅलिफाइ करनेवाला भारत एशिया का एकलौता देश है. जूनियर लेवेल पर भारत एशिया कप चैंपियन बन चुका है, जिससे साफ है कि एशिया महाद्वीप के स्तर पर भारत के लिए आनेवाला कल भी सुहावना है. यहां से भारत को हॉकी में ग्लोबल ताकत बनने की दिशा मे बढ़ना है. यानी आनेवाले वर्षों में ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, हॉलैंड को टक्कर देना है, जो आसान नहीं होगा. भारतीय हॉकी टीम ने हाल में ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट सीरीज के एक मैच में जरूर हराया, लेकिन सीनियर टीम के एक खिलाड़ी ने कहा कि एशिया और यूरोप की हॉकी में एक बड़ा फासला है. इस फासले को योजनावार तरीके से भरा तो जा सकता है, लेकिन इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है.
हॉकी इंडिया ने हॉकी प्रीमियर लीग और खिलाड़ियों के वेतन में पेशेवर रवैया लाया है. टेरी वॉल्श और पॉल वन एस जैसे पेशेवर कोच ने टीम को मजबूत बनाया है. लेकिन, जैसे ही वे उड़ान भरनेवाले थे, हॉकी इंडिया के सामंती रवैये ने उन्हें बोरिया-िबस्तर बांध कर वापस जाने पर मजबूर कर दिया. इस लिहाज से यह जरूरी है कि उन जैसे कोच को एक लंबा मौका दिया जाये. वहीं हरिंदर सिह ने जूनियर टीम के मुख्य कोच के तौर पर न सिर्फ खुद को साबित किया है, बल्कि यह दिखाया है कि सही ट्रेनिंग और एक्सपोजर मिलने पर भारतीय कोच किसी से कम नहीं. भारतीय टीम का पतन तब शुरू हुआ था, जब जूनियर हॉकी टीम पूरी तरह से दिशाहीन हो गयी थी. कोच और टीम प्रबंधन खिलाड़ियों की उम्र की चीटिंग करते और जीत के लिए किसी भी तरह की शॉर्ट कट को अपनाते थे, लेकिन अब जूनियर हॉकी को पेशेवर तरीके से संवारा जा रहा है और परिणाम सामने है. अगला कदम अब ‘हाइ परफॉरमेंस सेंटर’ बनाये जाने और जूनियर हॉकी को यूरोप में ज्यादा सीरीज खिलाये जाने की है, जिससे कि यह सीनियर टीम की रीढ़ साबित हो. अगर ऐसा होता है, तो भारतीय हॉकी टीम एशिया से आगे जाकर ग्लोबल लेवेल पर अपनी बादशाहत को कायम करने में कामयाब होगी.
अभिषेक दुबे
वरिष्ठ खेल पत्रकार
abhishekdubey1975
@gmail.com
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




