राज्य में क्षेत्रीय फिल्मों पर कुठाराघात
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Sep 2015 6:02 AM (IST)
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दुनिया के किसी भी समाज में आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विभिन्नताएं पायी जाती हैं. ऐसे विविधता भरे समाज के लोग अपनी परंपराओं को मान कर ही आज संपन्न हैं. हमारे देश में भी समाज में सामाजिक और आर्थिक विषमताएं व्याप्त हैं. उनमें झारखंड के आदिवासियों की दशा अत्यंत दयनीय है. इसके बावजूद वे अपनी संस्कृति […]
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दुनिया के किसी भी समाज में आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विभिन्नताएं पायी जाती हैं. ऐसे विविधता भरे समाज के लोग अपनी परंपराओं को मान कर ही आज संपन्न हैं.
हमारे देश में भी समाज में सामाजिक और आर्थिक विषमताएं व्याप्त हैं. उनमें झारखंड के आदिवासियों की दशा अत्यंत दयनीय है. इसके बावजूद वे अपनी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाये हुए हैं. आदिवासी अपनी संस्कृति और उद्यम से ही उन्नति करेगा. उसे तो सिर्फ उचित अवसर की तलाश है.
आधुनिक युग में सबकी इच्छा मनोरंजन के साथ संस्कृति को बचाये रख कर खुशहाल जीवन जीने की होती है. इसी सोच के आधार पर राज्य में क्षेत्रीय फिल्मों का निर्माण शुरू किया गया था. मगर सरकार ने जो आर्थिक सहायता की पेशकश ही है, उससे क्षेत्रीय फिल्मों का विकास होने के बजाय वह कुठाराघात के समान है.
– चुन्नू मरांडी, मधुपुर
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