विद्यार्थी नकल करने को मजबूर क्यों?
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 May 2015 5:21 AM (IST)
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कहा जाता है कि किसी चीज या घटना को अंजाम देने के पीछे भी कोई मजबूरी या तीव्र लालसा होती है. ठीक इसी प्रकार विद्यार्थियों को आज परीक्षा में नकल करने को मजबूर होना पड़ रहा है, क्यों? यह एक बड़ा सवाल है, क्योंकि सरकार की शिक्षा नीति ही ऐसी है. एक ओर विद्यार्थियों और […]
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कहा जाता है कि किसी चीज या घटना को अंजाम देने के पीछे भी कोई मजबूरी या तीव्र लालसा होती है. ठीक इसी प्रकार विद्यार्थियों को आज परीक्षा में नकल करने को मजबूर होना पड़ रहा है, क्यों? यह एक बड़ा सवाल है, क्योंकि सरकार की शिक्षा नीति ही ऐसी है.
एक ओर विद्यार्थियों और माता-पिता की तीव्र लालसा है कि बच्च अच्छे से अच्छा अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण हो. चाहे इसके लिए कुछ भी क्यों न करना पड़े. हर कीमत पर उन्हें अच्छे अंकों की दरकार होती है.
वहीं दूसरी ओर, सरकार की भयंकर गलत शिक्षा नीति का होना भी छात्रों को इस ओर उन्मुख करता है. शिक्षकों की घोर कमी के बावजूद शिक्षक नियुक्ति का नहीं होना भी इसका एक बड़ा कारण हो सकता है. फिर शिक्षकों की घोर कमी के बावजूद अनेक शिक्षकों को जिंदगी भर अशैक्षणिक कार्यो में लगा दिया गया है. सरकार के ‘शिक्षा का अधिकार’ कानून ने तो होनहार विद्यार्थियों को भी पंगु बना दिया है.
दिमाग में तो कुछ है ही नहीं, तो विद्यार्थी परीक्षा में चोरी नहीं करेगा, तो क्या करेगा? फिर मध्याह्न् भोजन ने अनेक शिक्षकों को शिक्षा कार्य से मुक्त ही कर दिया है. ऐसी स्थिति में स्कूलों में आनेवाले बच्चों को पढ़ायेगा कौन? नेता, मंत्री या फिर शिक्षा विभाग से जुड़े हुए अधिकारी? अत: सरकार से आग्रह है कि वह शिक्षा नीति में बदलाव करे. होनहारों को आगे बढुने का सही मार्ग मुहैया कराने की दिशा में ठोस कदम उठाये. यही वह भारत है, जिसने विश्व को ज्ञान ज्योति परोसा था.
अनेक वैज्ञानिकों, धार्मिक नेताओं तथा शिक्षाविदों को पैदा किया था, लेकिन आज सरकार ने उस परंपरा की नसबंदी करा दी है. आज सरकार लोगों को विद्वान नहीं, साक्षर बनाने की दिशा में काम कर रही है.
अणिमा प्रसाद, चक्रधरपुर
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