समाज पर गहरा असर डालते विज्ञापन

पिछले दिनों रक्षाबंधन के अवसर पर टीवी पर एक टेलीकॉम कंपनी का विज्ञापन आ रहा था. इसमें एक लड़की पुलिसवाले से रास्ता पूछती है और फिर उसकी कलाई सूनी देख कर उसे राखी बांधती है. बदले में पुलिसवाला उसे अपना मोबाइल नंबर यह कह कर देता है कि कभी भी जरूरत पड़ने पर वह उसे […]
पिछले दिनों रक्षाबंधन के अवसर पर टीवी पर एक टेलीकॉम कंपनी का विज्ञापन आ रहा था. इसमें एक लड़की पुलिसवाले से रास्ता पूछती है और फिर उसकी कलाई सूनी देख कर उसे राखी बांधती है. बदले में पुलिसवाला उसे अपना मोबाइल नंबर यह कह कर देता है कि कभी भी जरूरत पड़ने पर वह उसे कॉल कर सकती है.
है तो यह विज्ञापन, लेकिन इतना मर्मस्पर्शी कि देखनेवाले को भावुक कर जाये. विज्ञापन यह सकारात्मक संदेश देता है कि अपने अच्छे व्यवहार से पुलिस और पब्लिक के बीच अच्छा सामंजस्य स्थापित हो सकता है. टीवी और सिनेमा से समाज काफी प्रभावित होता है. लेकिन यह बात सबको समझने की जरूरत है, खासकर विज्ञापन बनानेवाली एजेंसियों को, जो आजकल अपने साधारण से डियोडरेंट को भी ऐसे पेश करती हैं, जैसे वह डियोडरेंट न होकर वियाग्रा हो.
पूनम त्रिवेदी ‘श्राघ्या’, मटवारी, हजारीबाग
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