संस्कृति की रक्षा के लिए अच्छी पहल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Apr 2015 11:09 PM (IST)
विज्ञापन

सरायकेला में तीन दिनी छऊ महोत्सव का समापन हो गया. राज्य सरकार की ओर से इसके आयोजन को लेकर खूब तैयारियां की गयी थी. आयोजन सफल भी रहा. यह पहला अवसर है, जब सरकार के स्तर पर इस तरह का आयोजन किया गया था. मुख्यमंत्री से लेकर राज्य के तमाम आलाधिकारी इसमें शरीक हुए. सांस्कृतिक […]
विज्ञापन
सरायकेला में तीन दिनी छऊ महोत्सव का समापन हो गया. राज्य सरकार की ओर से इसके आयोजन को लेकर खूब तैयारियां की गयी थी. आयोजन सफल भी रहा. यह पहला अवसर है, जब सरकार के स्तर पर इस तरह का आयोजन किया गया था. मुख्यमंत्री से लेकर राज्य के तमाम आलाधिकारी इसमें शरीक हुए.
सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर शासन-प्रशासन की ओर से की गयी यह पहल निश्चित रूप से काबिलेतारीफ है. महोत्सव के दौरान छऊ के संवर्धन और विकास का संकल्प लिया गया. कई घोषणाएं भी हुईं. सीएम ने स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रम से छऊ के कलाकारों को जोड़ने की बात कही. साथ ही सरायकेला के राजमहल को हेरिटेज बनाने की घोषणा की.
मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृति को बचाने के लिए छात्रों को अब मातृभाषा में शिक्षा देने की व्यवस्था की जा रही है. महोत्सव के दौरान छऊ को पूरे विश्व में ख्याति दिलानेवाले गुरुओं को भी सम्मानित किया गया. संस्कृति को बचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से की जा रही इस पहल को क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा काफी सराहा जा रहा है.
लेकिन सवाल यह है कि क्या घोषणा और संकल्प मात्र से संस्कृति और धरोहरों का बचाया जा सकता है. क्या कलाकारों को सिर्फ सम्मानित कर देने भर से उनकी स्थिति सुधर सकती है. यह जानकर आश्चर्य होगा कि सरायकेला, जहां की आबादी मात्र हजारो में है, वहां पाच पद्यश्री पुरस्कार विजेता हैं और ये सभी छऊ नृत्य के कलाकार हैं.
लेकिन आज इन पद्यश्री विजेता कलाकारों की स्थिति पर गौर करें, तो कइयों की स्थिति संतोषजनक नहीं है.देख कर और सुन कर निराशा होगी. ऐसी बात नहीं है कि छऊ की कोई पहचान नहीं है. आज भी सरायकेला जैसी छोटी जगह पर देश-विदेश से कलाकार इस नृत्य को सीखने आते हैं. महीनों रह कर वे इस कला को सीखते हैं और फिर अपने देश लौट जाते हैं.
कहीं कोई स्तरीय संस्थान नहीं है, जहां इस तरह की ट्रेनिंग दी जा सके. हालांकि वर्षो से इसकी मांग होती रही है कि छऊ के लिए अलग विश्वविद्यालय बनाया जाये, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो पायी है. अगर इस तरह की कोई व्यवस्था हो जाये, तभी सही मायने में छऊ और इससे जुड़े कलाकारों का भला हो पायेगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




