रोजगारपरक शिक्षा है नकल का हल

Published at :08 Apr 2015 3:51 AM (IST)
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रोजगारपरक शिक्षा है नकल का हल

परीक्षा में नकल हमारी परीक्षा पद्धति के साथ-साथ शिक्षा पद्धति और व्यवस्था का छुपा हुआ दोष है. छात्र इस योग्य नहीं बन पा रहे हैं, जो व्यक्तिगत और मानसिक कुशलता और दक्षता से परिपूर्ण हों. उनका सतत और समग्र मूल्यांकन नहीं हो पाता है. जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षण के सारे उपकरणों का प्रयोग होता […]

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परीक्षा में नकल हमारी परीक्षा पद्धति के साथ-साथ शिक्षा पद्धति और व्यवस्था का छुपा हुआ दोष है. छात्र इस योग्य नहीं बन पा रहे हैं, जो व्यक्तिगत और मानसिक कुशलता और दक्षता से परिपूर्ण हों. उनका सतत और समग्र मूल्यांकन नहीं हो पाता है. जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षण के सारे उपकरणों का प्रयोग होता है.
हमारी परीक्षण पद्धतियां साधनहीन हैं. किसी प्रकार प्रमाण पत्र प्राप्त कर छात्र प्रतियोगी परीक्षा के लिए कोचिंग संस्थानों का सहारा लेते हैं. उनका व्यक्तित्व कुंठित होता जा रहा है. फलत: नकल की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. छात्र आशावादी न होकर भाग्यवादी हो रहे हैं. बढ़ती बेकारी इसका साक्षात प्रमाण है. सामान्य शिक्षा की तो छोड़िए, तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवा भी बेरोजगार हैं. कहीं न कहीं भयंकर चूक हो रही है. रोजगारपरक शिक्षा में नकल का समाधान नजर आता है.
हरे मुरारी पांडेय, गांडेय, गिरिडीह
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