कहीं धूप है, तो कहीं छाया
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Jan 2015 6:21 AM (IST)
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इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायनों में अनोखा साबित हुआ है. इस चुनावी दंगल में दो चतुर नेताओं- यशवंत सिन्हा और इंदर सिंह नामधारी ने हिस्सा नहीं लिया. लोकसभा चुनाव से दूर रहने के कारण यह कहा जा रहा था कि सिन्हा विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं. उनके पास राजनीतिक जीवन का लंबा […]
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इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायनों में अनोखा साबित हुआ है. इस चुनावी दंगल में दो चतुर नेताओं- यशवंत सिन्हा और इंदर सिंह नामधारी ने हिस्सा नहीं लिया. लोकसभा चुनाव से दूर रहने के कारण यह कहा जा रहा था कि सिन्हा विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं. उनके पास राजनीतिक जीवन का लंबा अनुभव है. इन दोनों का चुनावी दंगल से दूर रहना लोगों को चौंका गया.
खैर, पुराने मुख्यमंत्रियों को पटखनी देते हुए रघुवर दास ने राज्य की सत्ता संभाली है. जनता ने उन्हें बहुमत दिया है. लेकिन देखना यह है कि वे सरकार कैसे चलाते हैं. अगर नेता चतुर हैं, तो नेताओं को बहुमत देनेवाली जनता चतुर सुजान है. इसके साथ ही, इस चुनाव में जिन पुराने और घाघ नेताओं को पटखनी मिली है, उनके लिए तो यही कहा जायेगा कि यह राम जी की माया है, कहीं धूप तो कहीं छाया है.
भगवान ठाकुर, तेनुघाट
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