सबके लिए हो एक जैसा न्याय

न्याय तो आखिर न्याय होता है, चाहे राजा हो या प्रजा, चाहे आम हो या खास, चाहे अमीर हो या गरीब, सबके लिए एक जैसा न्याय. लेकिन आज हमारे लोकतंत्र में जब कोई खास व्यक्ति आरोपी होता है, तो उसे बचाने की पूरी कोशिश की जाती है. लेकिन ऐसे ही कुकर्म में कोई हाशिये का […]
न्याय तो आखिर न्याय होता है, चाहे राजा हो या प्रजा, चाहे आम हो या खास, चाहे अमीर हो या गरीब, सबके लिए एक जैसा न्याय. लेकिन आज हमारे लोकतंत्र में जब कोई खास व्यक्ति आरोपी होता है, तो उसे बचाने की पूरी कोशिश की जाती है. लेकिन ऐसे ही कुकर्म में कोई हाशिये का आम आदमी फंस जाता है, तो जनता में आक्रोश पनप जाता है. यह आम व खास के बीच की लक्ष्मण रेखा न्याय प्रणाली को प्रभावित करती है.
जब किसी कुकर्म में सांसद, विधायक या बड़े अधिकारी का नाम आता है, तो जनता उतनी आक्रोशित नहीं होती. जबकि जनता का आक्रोश तो यहां ज्यादा होना चाहिए. प्रजातंत्र में आम आदमी और खास आदमी के लिए अलग-अलग प्रणाली नहीं हो सकती. फिर इन्हें लेकर लोगों में अलग-अलग सोच हो जाती है, तो यह उचित नहीं है. सरकार और अदालतों को निष्पक्षता के साथ दायित्व निभाना होगा.
हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, मध्य प्रदेश
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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