सामाजिक सुरक्षा कानून लागू करना साहसिक कदम
Updated at : 15 Jul 2019 6:56 AM (IST)
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इन दिनों संतानों द्वारा माता-पिता के साथ जितना अन्याय हो रहा है, उससे रूह कांप उठता है. वृद्ध मां-बाप के लिए भोजन-पानी, दवा और समुचित देखभाल आज बच्चों द्वारा दूभर हो गया है, परिणामस्वरूप उनका सामाजिक प्रतिष्ठा आज बच्चों द्वारा ही भेंट चढ़ जा रहा है. ऐसे में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. […]
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इन दिनों संतानों द्वारा माता-पिता के साथ जितना अन्याय हो रहा है, उससे रूह कांप उठता है. वृद्ध मां-बाप के लिए भोजन-पानी, दवा और समुचित देखभाल आज बच्चों द्वारा दूभर हो गया है, परिणामस्वरूप उनका सामाजिक प्रतिष्ठा आज बच्चों द्वारा ही भेंट चढ़ जा रहा है.
ऐसे में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. नीतीश कुमार की कैबिनेट ने सामाजिक सुरक्षा कानून के तहत अब बुजुर्गों की सेवा नहीं करने वाले बेटा-बेटी को जेल की सजा के प्रावधान को मंजूरी देकर एक क्रांतिकारी फैसला लिया है. माता-पिता का अपमान करने पर आर्थिक दंड 5000 रुपये या तीन माह कैद की सजा और संपत्ति अपने नाम कराने के बाद माता-पिता को घर से निकालने पर निबंधन रद्द करना एक सामाजिक, ऐतिहासिक और साहसिक कदम है.
डॉ संजीव कुमार, बोरिंग कैनाल रोड (पटना)
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