लाली मेरे लाल की
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Jul 2019 7:21 AM
आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार puranika@gmail.com बजट से कुछ मिले, न मिले, थोड़ी राहत यह मिल जाती है कि टीवी चैनलों पर इस तरह की खबरें कम हो जाती हैं- सुमित्रा ने सौतन की पिटायी की या क्या उस सड़क पर रात को आती है चुड़ैल. बेरोजगारी से छुटकारा न दिलवाये बजट, चुड़ैल से ही दिलवा […]
आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
puranika@gmail.com
बजट से कुछ मिले, न मिले, थोड़ी राहत यह मिल जाती है कि टीवी चैनलों पर इस तरह की खबरें कम हो जाती हैं- सुमित्रा ने सौतन की पिटायी की या क्या उस सड़क पर रात को आती है चुड़ैल. बेरोजगारी से छुटकारा न दिलवाये बजट, चुड़ैल से ही दिलवा दे, तो कम है क्या!
एक चालू टीवी चैनल पर बजट विमर्श यूं संपन्न हुआ-
एंकर- मेरे विचार में इस बजट की सबसे बड़ी घटना यह है कि वित्तमंत्री ब्रीफकेस छोड़कर लाल रंग की खाता-बही या लाल रंग की फाइल जैसा कुछ लेकर चलीं बजट पेश करने.
भाजपा प्रवक्ता- मोदीजी के नेतृत्व में लाल रंग का आविष्कार हुआ. उसी लाल रंग के बही खाते में वित्त मंत्री ने बजट पेश किया. अब अर्थव्यवस्था पर लाली छा जायेगी.
कांग्रेस प्रवक्ता- लाल रंग तो तब से मौजूद है, जब से कांग्रेस का जन्म हुआ था. मुझे लगता है कि दुनिया की हर चीज कांग्रेस के जन्म के साथ ही शुरू हुई है. लाल रंग का श्रेय लेने की कोशिश भाजपा न करे.
सीपीआई के प्रवक्ता- लाल रंग सिर्फ हमारा है. हम लाल सलाम करते हैं. भाजपा ने हमारे लाल रंग पर कब्जा करने की कोशिश की है. यह हम नहीं होने देंगे.
एंकर- काॅमरेड आप कहते तो हैं, होने नहीं देंगे, पर सब तो हुआ जा रहा है. आप की बजट पर क्या प्रतिक्रिया है?
सीपीआई प्रवक्ता- सब गलत हो रहा है. बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, छोटे उद्यमों की ओर ध्यान नहीं है. एंकर- काॅमरेड आप सही कह रहे हैं छोटे उद्यमों में ज्यादा रोजगार मिलता है फैमिली मेंबर को. फैमिली आधारित पार्टियों में पूरा कुनबा ही एमपी-एमएलए बन जाता है. बड़ी पार्टियों में ऐसा मुश्किल होता है. क्या छोटी राजनीतिक कारोबारी पार्टियों को बढ़ावा मिलना चाहिए?
ममता बनर्जी की पार्टी के प्रवक्ता- यह मोदी का साजिश है. लेफ्टवाला सब मोदी से मिला हुआ है. लेफ्ट के लाल रंग की फाइल में यह बजट पेश किया गया है. हम पहले से ही कह रहे हैं, लेफ्ट और भाजपा मिला हुआ है.
एंकर- लेकिन बंगाल में तो ममता की पार्टी के मेंबरान पर आरोप लग रहे हैं कि वे हर आइटम में पैसे खा रहे हैं? गर्भवती महिला को मिलनेवाली सहायता से लेकर दाह संस्कार में मिलनेवाली सहायता तक में उनकी पार्टी के नेता कट कमीशन खा रहे हैं. हम जुड़ रहे हैं बंगाल के अपने रिपोर्टर से-
बंगाल का रिपोर्टर- जी, ममता बनर्जी का जो नेता लोग कट कमीशन खा गये हैं, वो कह रहे हैं कि मोदी सरकार बंगाल के साथ भेदभाव करता है और बंगाल को बड़ा-बड़ा प्रोजेक्ट नहीं देता है. जब बड़ा-बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिलेगा, तो नेता क्या करेगा.
वो छोटे आइटमों में खाता है, गर्भवती महिला की मदद से भी खाता है और कफन में से भी खाता है. इसलिए बंगाल के कई नेताओं का मांग है कि बजट में बंगाल के लिए बड़ा-बड़ा प्रोजेक्ट लाएं, ताकि उनमें बड़ा-बड़ा खा सकें.स्टूडियो में लातम-जूतम शुरू है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










