खूबसूरत मुलाकात पर हंगामा क्यों?

Published at :17 Jul 2014 5:58 AM (IST)
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खूबसूरत मुलाकात पर हंगामा क्यों?

।। जावेद इस्लाम ।। प्रभात खबर, रांची हाफिज सईद-वेद प्रताप वैदिक मिलन प्रकरण में मोदी सरकार के लोग नाहक पल्ला झाड़ रहे हैं. दो दिल मिले, तो मिले, इसमें रक्षात्मक होने की क्या जरूरत है? पत्रकार तो किसी से भी मिल सकता है. और फिर, वैदिक जी प्रखर राष्ट्रवादी और दिग्गज पत्रकार हैं, विदेशी मामलों […]

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।। जावेद इस्लाम ।।

प्रभात खबर, रांची

हाफिज सईद-वेद प्रताप वैदिक मिलन प्रकरण में मोदी सरकार के लोग नाहक पल्ला झाड़ रहे हैं. दो दिल मिले, तो मिले, इसमें रक्षात्मक होने की क्या जरूरत है? पत्रकार तो किसी से भी मिल सकता है. और फिर, वैदिक जी प्रखर राष्ट्रवादी और दिग्गज पत्रकार हैं, विदेशी मामलों के प्रकांड पंडित. भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष पद पर ऐसे ही थोड़े न सुशोभित हैं!

वे पाकिस्तान भले भारत सरकार के खर्च पर और सरकारी हैसियत से गये हों, पर मुङो पूरा यकीन है कि उन्होंने सईद से मिलने जाने से पहले सरकारी हैसियत का अपना बाना उतार लिया होगा और पत्रकार का बाना धारण कर लिया होगा. कुछ नादान फोटो में दिख रही उनकी बंडी के रंग को सरकार में बैठी पार्टी के रंग से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे लोगों पर तरस ही खाया जा सकता है. भई, रमजान का महीना चल रहा है. इस पवित्र महीने में, थोड़ी देर के लिए ही सही, दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं.

अब ऐसे नेक वक्त में अगर वैदिक जी ने सईद से मिल लिया, तो किसी को मिर्ची क्यों लगनी चाहिए? अमन का इतना बड़ा पैगाम देकर उन्होंने महान और काबिल-ए-तारीफ काम किया है. उन्हें फूलों का हार पहनाया जाना चाहिए, पर बदकिस्मती से संसद में उनकी गिरफ्तारी की मांग उठ रही है.

इस मुलाकात का एक फायदा और हुआ होगा. सईद को एक सच्चे, प्रखर राष्ट्रवादी भारतीय के तेज और प्रताप का पता चला होगा. मुङो यकीन है कि वह डर कर कांपने लगा होगा और आइंदा भारत से किसी तरह का पंगा लेने की हिमाकत नहीं करेगा. वह वैदिक जी के आगे गिड़गिड़ाया होगा, ‘‘26/11 हमले का मुकदमा पाकिस्तान की अदालत में चले तो ही अच्छा.

आखिर आप लोग पाकिस्तानी अदालतों पर भरोसा क्यों नहीं करते?’’ वैदिक जी ने जवाब दिया होगा, ‘‘पाकिस्तान की अदालत पर तो खुद पाकिस्तानियों को भरोसा नहीं है जनाब! बेहतर होगा कि आप भारतीय अदालतों पर भरोसा कीजिए, आपके साथ इंसाफ होगा. भारतीय न्यायपालिका पूरी तरह निष्पक्ष है. अमित शाह के वकील रहे एक काबिल वकील अभी सुप्रीम कोर्ट के जज बने हैं, पर हर किसी को यकीन है कि यह नियुक्ति निष्पक्ष है और इसमें कोई राजनीतिक दखलअंदाजी नहीं है. भारतीय न्यायपालिका में जनता की आस्था इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है?’’

वैदिक जी को सईद का दिमाग पढ़ने का भी मौका मिला. अब वह उसके दिमाग का नक्शा बना कर सरकार को देंगे, ताकि सरकार उसके दिल नहीं, तो दिमाग पर काबू पाकर उसे अपने वश में कर सके. बाबा रामदेव ने सही फरमाया है कि वैदिक जी ने सईद के हृदय-परिवर्तन की कोशिश की है. मुङो यकीन है कि भविष्य में यह कोशिश रंग लायेगी. अगर इससे भी बात नहीं बनी तो सईद को बाबा रामदेव के आश्रम में ले आया जायेगा, जहां वह योग उसका हृदय परिवर्तन कर देंगे.

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