क्या मेयर पद का कोई महत्व नहीं?

राजधानी रांची में सोमवार को बहुप्रतीक्षित मेयर चुनाव संपन्न हो गया. चुनाव शांतिपूर्वक और बिना विवाद के संपन्न हुआ, लेकिन मतदान के प्रति लोगों में कोई उत्साह नहीं दिखायी दिया. रांची नगर निगम क्षेत्र के करीब छह लाख मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग नहीं किया. जबकि निगम क्षेत्र में कुल सात लाख 26 हजार […]
राजधानी रांची में सोमवार को बहुप्रतीक्षित मेयर चुनाव संपन्न हो गया. चुनाव शांतिपूर्वक और बिना विवाद के संपन्न हुआ, लेकिन मतदान के प्रति लोगों में कोई उत्साह नहीं दिखायी दिया. रांची नगर निगम क्षेत्र के करीब छह लाख मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग नहीं किया. जबकि निगम क्षेत्र में कुल सात लाख 26 हजार 352 मतदाता हैं.
यानी, मात्र एक लाख 28 हजार मतदाता ही घर से निकले. यह हाल है शहर के प्रथम नागरिक के चुनाव का. मेयर किसी शहर की व्यवस्था का अहम हिस्सा होता है. शहर के विकास और शहरी समस्याओं के निराकरण की जिम्मेदारी उस पर होती है. चुनाव लोकसभा का हो, विधानसभा का हो या फिर स्थानीय स्तर पर होनेवाले निकायों का, इन सब चुनावों के लिए शासन-प्रशासन की ओर से महीनों पूर्व तैयारी की जाती है. ज्यादा से ज्यादा लोग घरों से निकलें और मतदान करें, इसके लिए प्रशासन की ओर पुरजोर प्रयास किया जाता है. मतदाताओं को जागरूक किया जाता है. लेकिन इस चुनाव में अगर वोटिंग प्रतिशत को देखें, तो प्रशासन के तमाम दावे उलट दिखायी पड़ते हैं.
अब सवाल यह उठता है कि क्या सबकुछ प्रशासन के भरोसे ही छोड़ना उचित है? नहीं. एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमसब का भी यह दायित्व बनता है कि घर से निकलें और मतदान करें. सरकार की ओर से छुट्टी की घोषणा के बावजूद लोगों ने उसका उपयोग वोट डालने के बजाय घर पर बैठने में किया. भीषण गर्मी के बीच हुए लोकसभा चुनाव में जहां मतदान प्रतिशत लगभग 70 प्रतिशत रहा, वहीं सिर्फ दो महीने बाद हुए निकाय चुनाव में यह घट कर 17.72 फीसदी हो जाता है.
इसके कारण तलाशे जाने चाहिए. लोकसभा चुनाव का जागरूक मतदाता अचानक उदासीन कैसे हो गया? क्या स्थानीय निकाय से उसे कोई उम्मीद दिखायी नहीं देती, या फिर वह इसका महत्व नहीं जानता? वोट के प्रतिशत से भले ही चुनाव परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ता हो, लेकिन एक पूरी प्रणाली की आस्था पर सवाल खड़ा हो जाता है. इस चुनाव से रांची नगर निगम को सबक लेना चाहिए. एक बड़े हिस्से का मानना है कि खराब मतदान निगम के निकम्मेपन का नतीजा है. लोगों को लगता है कि वोट देने से क्या होगा?
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