अभी तो और अच्छे दिन आयेंगे जनाब!

Updated at : 25 Jun 2014 5:38 AM (IST)
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अभी तो और अच्छे दिन आयेंगे जनाब!

।। जावेद इस्लाम ।। प्रभात खबर, रांची महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर, संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुन कर सभी गदगद थे. सभी को यकीन हो गया कि अच्छे दिन आनेवाले हैं. कुछ भगतजनों ने कहा कि इस भाषण को ही अच्छे दिनों का शुभारंभ समङिाए. ऐसा धांसू भाषण इससे पहले किसी […]

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।। जावेद इस्लाम ।।

प्रभात खबर, रांची

महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर, संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुन कर सभी गदगद थे. सभी को यकीन हो गया कि अच्छे दिन आनेवाले हैं. कुछ भगतजनों ने कहा कि इस भाषण को ही अच्छे दिनों का शुभारंभ समङिाए. ऐसा धांसू भाषण इससे पहले किसी प्रधानमंत्री ने दिया था, नहीं न? मोदी जी ने इस भाषण में देश के विकास का गोवर्धन पर्वत अपने माथे पर जिस तरह से उठा लिया, वह काबिले तारीफ तो है ही!

ऐसा कौन-सा मुद्दा है जिसकी चर्चा भाषण में नहीं? और यदि एकाध मुद्दा रह भी गया हो, तो हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए. उनके वित्त मंत्री जेटली जी अगले महीने सदन में आम बजट की पोटली खोलने वाले हैं, उसमें रही-सही कसर पूरी कर देंगे.. जो भी हो, अच्छे दिनों का आगाज हो गया है. रेल मंत्री गौड़ा जी ने 14.2 फीसद रेल भाड़ा बढ़ा कर अच्छे दिनों की रेल को सुशासन की पटरी पर दौड़ा दिया है.

पेट्रोलियम महकमे के मंत्री महंगाई नामक कभी न सीधी होनेवाली दुम के नीचे पेट्रोल डालने को बेताब हैं. वह देशहित में डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस सबके दाम बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. हर मंत्रालय अच्छे दिनों की तैयारी में जुटा है. सरकार आम आदमी के स्वास्थ्य को लेकर भी काफी चिंतित है. तभी तो चीनी का दाम बढ़ाने वाली है. ताकि चीनी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाये और लोग चीनी की बीमारी की चपेट में आने से बच जायें. आम आदमी के दिन बहुरें, इसके लिए उसे जनादेश मिला है.

इसके लिए उसे कड़े से कड़े कदम उठाने का हक है. सोनिया-मनमोहन सरकार की यही तो कमजोरी थी, कड़े कदम डरते-डरते उठाती थी. 2014 के आम चुनावों के डर से उसके पैरों में पोलियो मार गया था. लेकिन मोदी जी का रास्ता निष्कंटक है. वैसे, यदि कांग्रेस के नेतृत्ववाली यूपीए-3 सरकार बनी होती, तो वह भी यही कड़े कदम उठाती और विपक्ष में होने के नाते भाजपा जनहित का मुखौटा लगा कर आसमान सिर पर उठा लेती. नीतियों के मामले में दोनों का डीएनए एक है, मगर वक्त के हिसाब से सत्ता पक्ष व विपक्ष का धर्म निभाने में दोनों माहिर हैं. इसलिए भाजपा अभी वही सत्ता धर्म निभा रही है जो सत्ता में रहते कांग्रेस निभा रही थी.

और, कांग्रेस उसी विपक्ष धर्म पर चलने की कोशिश कर रही है जिस पर भाजपा चलती रही थी. यह अलग बात है कि ऐसा करते हुए भी वह पोलियोग्रस्त ही दिख रही है. महंगाई के खिलाफ कांग्रेस को चीखते देख लोगों को वैसा ही मजा आ रहा है जैसे रामसे ब्रदर्स की हॉरर फिल्म में कॉमेडी. जनता विपक्ष की कॉमेडी का मजा भले ले रही हो, पर उसे अच्छे दिनों की हवा अब लू की तरह झुलसाने लगी है. रूठी हुई बारिश की तरह तरसाने लगी है. कमाल की बात है, दिन में 10-10 भाषण दागनेवाले मोदी जी गायब हैं. कहीं उनके शुभचिंतक बाबा रामदेव उन्हें सुसुप्तासन तो नहीं सिखा रहे?

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