महिलाओं के प्रति सोच बदलने की जरूरत
Author Prabhat khabar digital desk
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हमारा समाज एक पुरुष प्रधान समाज रहा है. कालांतर से इस समाज द्वारा महिलाएं शोषित होती रही हैं. समय-समय पर सरकार द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए कई प्रकार की योजनाओं का शुभारंभ किया गया, लेकिन सिर्फ योजनाओं को लागू कर देने से महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिल सकता. एक तरफ […]
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हमारा समाज एक पुरुष प्रधान समाज रहा है. कालांतर से इस समाज द्वारा महिलाएं शोषित होती रही हैं. समय-समय पर सरकार द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए कई प्रकार की योजनाओं का शुभारंभ किया गया, लेकिन सिर्फ योजनाओं को लागू कर देने से महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिल सकता. एक तरफ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला साक्षरता व कन्या भ्रूणहत्या के प्रति लोगों को जागरूक िकया जा रहा है, वहीं समाज में कुछ इस तरह के लोग भी हैं जो मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी करने से बाज नहीं आते हैं.
क्या महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना हर नागरिक का फर्ज नहीं है? एक बार गौर से सोच कर देखिए हम पुरुषों की जननी एक महिला ही है. ऐसे में अगर महिला ही नहीं रही तो पुरुष का अस्तित्व क्या रह जायेगा. इसलिए सोच बदलिए, ताकि महिलाएं स्वच्छंद, स्वतंत्र और उन्मुक्त होकर जी सकें.
राहुल सिंह, गोपालगंज
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