इसरो से प्रेरणा लें
Updated at : 25 Dec 2018 6:33 AM (IST)
विज्ञापन

इसरो देश की संचार और सैन्य क्षमता बढ़ाने के साथ अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहा है. वैसे तो देश के सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों को इसरो से प्रेरणा लेनी चाहिए, लेकिन सर्वाधिक अपेक्षा उन संगठनों से है, जिन पर सैन्य और असैन्य उपकरण बनाने की जिम्मेदारी है. यह तकनीक का युग है और […]
विज्ञापन
इसरो देश की संचार और सैन्य क्षमता बढ़ाने के साथ अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहा है. वैसे तो देश के सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों को इसरो से प्रेरणा लेनी चाहिए, लेकिन सर्वाधिक अपेक्षा उन संगठनों से है, जिन पर सैन्य और असैन्य उपकरण बनाने की जिम्मेदारी है. यह तकनीक का युग है और इसमें भारतीय संस्थानों को वैसी ही छाप छोड़नी होगी, जैसी इसरो छोड़ रहा है.
मिसाइल निर्माण के मामले में डीआरडीओ की सफलताओं पर संतोष जताया जा सकता है, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं कर सकते कि अन्य संगठन अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहे. हल्का लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना का हिस्सा बन गया, लेकिन इसके निर्माण में जरूरत से ज्यादा समय लगा. भारत को राइफल जैसे हथियार भी आयात करने पड़ते हैं. इसी तरह कई साधारण सैन्य साजो-सामान के लिए हम दूसरे देशों पर निर्भर हैं.
डाॅ हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




