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मौसम एक मेहमान है!

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मौसम एक मेहमान है!

मिथिलेश कु. राय युवा रचनाकार [email protected] कक्का कह रहे थे कि मौसम का आगमन मेहमान की तरह होता है. असल में उस दिन दक्षिण टोले से सुबह-सुबह सरसों का साग बिकने आ गया था और लोग उस पर टूट पड़े थे. उसके पीछे बटेसर भी धनिया का पत्ता और मूली बेचने निकल पड़ा था. यह […]

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मिथिलेश कु. राय
युवा रचनाकार
कक्का कह रहे थे कि मौसम का आगमन मेहमान की तरह होता है. असल में उस दिन दक्षिण टोले से सुबह-सुबह सरसों का साग बिकने आ गया था और लोग उस पर टूट पड़े थे. उसके पीछे बटेसर भी धनिया का पत्ता और मूली बेचने निकल पड़ा था. यह दृश्य देखकर कक्का भाव-विभोर हो उठे थे और उन्हें कुछ याद आने लगा था. वे कहने लगे कि जैसे जब भी कभी कोई नजदीकी रिश्तेदार हमारे यहां बहुत दिनों के बाद आता है तो वे खाली हाथ नहीं आते. कुछ न कुछ सौगात भी रख लेते हैं.
मेजबान मेहमान के आने और उनसे सौगात पाकर फूले नहीं समाते हैं. वैसे ही मौसम भी सालभर बाद कुछ महीनों के लिए आता है और हमारे सामने कई सौगात रख देता है. वे यह भी बताने लगे कि जैसे ही किसी घर में मेहमान का आगमन होता है, उस घर के सदस्यों के आचरण में एक बदलाव हो जाता है.
मेहमान के रहने तक सारे सदस्य अनुशासित रहते हैं और अपने खान-पान और पहनावे का भी ध्यान रखते हैं. इसी तरह जब नये मौसम का प्रवेश होने लगता है, हमारी जीवन-शैली स्वाभाविक रूप से बदलने लगती है. मेहमान भी खुश और मेजबान भी खुश.
कक्का कह रहे थे कि साल-साल भर बाद सुधि लेने की मौसम की आदत पुरानी है. इसलिए तो उनके आने का जब समय हो जाता है और फिर भी वे नहीं आते तो लोग परेशान हो जाते हैं और उनके जल्दी आने के लिए प्रार्थना करने लगते हैं. बरसात का मौसम जब भी आता है, वह अपने साथ अमरूद का सौगात जरूर लाता है. आह! पके अमरूद के स्वाद के क्या कहने.
बादलों से गिरती बूंदों का टिप-टिप का स्वर, मेढकों की आवाज, नदियों का भरना, धरती से उठती सौंधी गंध, ये सब किसी और मौसम में दुर्लभ है. बारिश आती है और आंखों को इन सुहाने दृश्यों से भर देती है. कक्का यह भी कह रहे थे कि सारे मौसमों में एक जाड़ा ही एक ऐसा मौसम है जो आता है तो मेजबान के लिए कई तरह की सौगातें लाता है. अंगीठी के पास हाथ सेंकते या रजाई में दुबके लोगों का मन गर्म-गर्म भोजन के अद्भुत स्वाद से रोमांचित रहता है.
यह खेतों को गेहूं का सौगात थमाता है और पोखरों को सिंघाड़े का. यह गांव और शहर के लोगों को त्योहारों के उत्साह में रंग देता है. रात को विश्राम करने के लिए लंबी कर देता है और दिन को छोटा. यह थाली को कई प्रकार के सब्जियों से भर देता है और बाजार में कश्मीरी सेब और मौसम्मी को उतार देता है.
कक्का ने यह भी कहा कि हमारे शरीर का भी मौसम से गहरा नाता होता है. इसलिए होशियार लोग मौसमी फलों और सब्जियों पर ध्यान देते हैं.
इन्हें कक्का मौसम का सौगात कह रहे थे. वे कह रहे थे कि गर्म-गर्म गाजर के हलवे का लुत्फ सर्दी में ही है. मूली, बंद गोभी, पालक और बथुए के साग की सौगात लेकर आने वाले इस मौसम में गुनगुनी धूप और सरसों के पीले फूलों को निहारने का मजा ही कुछ और होता है!
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