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जरा उस एंगल से डूबिए जी!

Updated at : 16 Jul 2018 6:24 AM (IST)
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जरा उस एंगल से डूबिए जी!

आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार बाढ़ आ रही है पूरे मुल्क में, साथ में बाढ़ पर बननेवाले वीडियो की सुपर बाढ़ आ रही है. किसी टूटे हुए पुल से कोई बाइक सवार नीचे नदी-नाले में गिर जाये, तो फौरन सैकड़ों लोग पहुंच जाते हैं और पहुंचते ही जुट जाते हैं, राहत कार्य में नहीं, बल्कि मोबाइल […]

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आलोक पुराणिक

वरिष्ठ व्यंग्यकार

बाढ़ आ रही है पूरे मुल्क में, साथ में बाढ़ पर बननेवाले वीडियो की सुपर बाढ़ आ रही है. किसी टूटे हुए पुल से कोई बाइक सवार नीचे नदी-नाले में गिर जाये, तो फौरन सैकड़ों लोग पहुंच जाते हैं और पहुंचते ही जुट जाते हैं, राहत कार्य में नहीं, बल्कि मोबाइल से वीडियो बनाने में. वीडियो वायरल हो जाये, इस वीडियो पर फेसबुक पर सौ लाइक आ जाएं, तो बाढ़ सार्थक मान लेते हैं ऐसे बंदे.

देखा जाये तो बाढ़ के फायदों का लोकतांत्रीकरण है, पहले बाढ़ से नेता रकम काटते थे, अफसर रकम कमाते थे. अब आम पब्लिक बाढ़ के वीडियो बनाकर लाइक बटोर रही है. जो पब्लिक बाढ़ में नहीं फंसी है, वह बाढ़ के वीडियो बना रही है.

ओ भाई! तू अगर मौके पर पहुंच गया है, तो जरा राहत पहुंचा दे. वीडियो बनाने की जगह मदद को हाथ बढ़ा दे.

नहीं, हाथ मदद को बढ़ा दिये, तो फिर वीडियो कौन बनायेगा. वीडियो बनाना सबसे जरूरी काम है. वायरल वीडियो बनाना तो मोक्ष की प्राप्त करना है.

मैं डर रहा हूं कि कुछ दिनों बाद टूटे हुए पुल पर जमा पब्लिक डूबते बाइक सवार को डपटने न लगे कि भाई साहब सही तरीके से डूबिए. उस एंगल से डूबिए, तब ही तो हमारे कैमरे में सही वीडियो बनेगा. हां, इसी एंगल से डूबते रहिए. हिलिए मत, बस यूं ही डूब जाइए, प्लीज. बहुत देर के बाद सटीक एंगल मिला है, ठीक ऐसे ही डूबिए.

दूसरा वीडियो खेंचक डपटेगा- सारा ध्यान उधर ही मत दीजिए डूबनेवाले भईया. हम भी तो आपका वीडियो बना रहे हैं, हमारी तरफ भी देखिए. हमारा भी एंगल सेट कीजिए. हमारे पास फेसबुक में पांच हजार फाॅलोअर हैं, आपके डूबने को ज्यादा लाइक मिलेंगे. यह न हो जाये कि डूबता बंदा खुद तैरकर बाहर निकल आये, पर वायरल वीडियो के चाहक उसे धकेल-धकेलकर फिर फेंक आएं नदी में- सही एंगल की तलाश में. बंदा बाढ़ से बच भी गया, तो वायरल वीडियोबाजों से न बच पायेगा.

वीडियो बनाना परम लक्ष्य है. पब्लिक लक्ष्य संधान में जुटी है. और पब्लिक से पहले नेता इस काम को अलग तरह से अंजाम दे चुके हैं. कामधाम धेले का नहीं, फोटू पे फोटू धकाधक आये जाती हैं.

मेरे मुहल्ले की नालियाें के निर्माण के फोटू पिछली बीस सालों में पच्चीस नेता सौ बार छपा चुके हैं, नालियां अब भी बन रही हैं. रिजल्ट धेले का नहीं, फोटू पे फोटू छापे जाओ. रिजल्ट सिर्फ फोटू है. बाढ़ से जुड़ी गतिविधियों में भी रिजल्ट वायरल वीडियो ही है. पुल टूटे जा रहे हैं, बंदे मरे जा रहे हैं, मगर राहत नहीं, वायरल वीडियो निकल रहे हैं.

आप शिकायत करें कि उस जगह पंद्रह हजार फुट ऊंचा कूड़े का पहाड़ है. वहां हजारों लोग पहुंच जायेंगे वीडियो बनाने. एक-एक फावड़ा लेकर इतने लोग जुट जाएं, तो कूड़ा साफ भी हो सकता है, पर नहीं-नहीं, कुछ दिनों बाद तो आफत यह हो जायेगी कि इस कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए अगर खुद सेना भी आ जाये, तो उसे पब्लिक भगा देगी- हमारे वायरल वीडियो स्पाॅट को हटाने की जुर्रत किसने की!

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