पानी की किल्लत और मानसिकता
Updated at : 30 Apr 2018 7:00 AM (IST)
विज्ञापन

गर्मियों के मौसम की दस्तक होते ही चारों ओर पानी के लिए हाहाकार शुरू हो जाता हैं, पर वर्षा ऋतु शुरू होते ही सब कुछ भुला दिया जाता है. सब भूल जाते हैं कि गर्मी फिर आयेगी और एक बार फिर से पानी के लिए हाहाकार मचेगा. हमारी लॉटरी वर्षा के रूप में हर वर्ष […]
विज्ञापन
गर्मियों के मौसम की दस्तक होते ही चारों ओर पानी के लिए हाहाकार शुरू हो जाता हैं, पर वर्षा ऋतु शुरू होते ही सब कुछ भुला दिया जाता है. सब भूल जाते हैं कि गर्मी फिर आयेगी और एक बार फिर से पानी के लिए हाहाकार मचेगा. हमारी लॉटरी वर्षा के रूप में हर वर्ष लगती है, पर जल रूपी धन रुके कैसे, इस पर हम चिंता नहीं करते. हमने तो अपनी जेबें फाड़ रखी है.
वर्षा ऋतु में जब पानी की बहुलता होती है, तभी पानी पर्याप्त मात्रा में संचित कर लेना चाहिए. जलस्तर कम होने से गर्मी की शुरुआत में ही कई चापाकल, कुएं और छोटी बरसाती नदियां सूख जाती है. इसको रोकने के लिए सभी बड़ी इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम होना अत्यंत जरूरी है. जनभागीदारी से ही इस समस्या को सुलझाया जा सकता है.
सीमा साही, बोकारो
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




