कानून में बदलाव दुर्भाग्यपूर्ण
Updated at : 26 Mar 2018 4:58 AM (IST)
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अब एससी एसटी कानून के तहत किसी व्यक्ति की सीधी गिरफ्तारी नहीं हो सकती. अगर व्यक्ति सरकारी कर्मचारी है, तो उसे नियुक्त करने वाले अधिकारी की अनुमति आवश्यक है और अगर व्यक्ति सरकारी कर्मचारी नहीं है, तो एसएसपी की अनुमति आवश्यक है. साथ ही अब अभियुक्त की जमानत पर भी पूर्ण […]
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अब एससी एसटी कानून के तहत किसी व्यक्ति की सीधी गिरफ्तारी नहीं हो सकती. अगर व्यक्ति सरकारी कर्मचारी है, तो उसे नियुक्त करने वाले अधिकारी की अनुमति आवश्यक है और अगर व्यक्ति सरकारी कर्मचारी नहीं है, तो एसएसपी की अनुमति आवश्यक है.
साथ ही अब अभियुक्त की जमानत पर भी पूर्ण प्रतिबंध को हटा लिया गया है. यह फैसला वास्तव में अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके दुरुपयोग होने की आशंका के आधार पर यह फैसला दिया है.
परंतु यह कोई ठोस आधार नहीं है, क्योंकि भारतीय संविधान में ऐसे कई कानून मौजूद हैं जिनका कभी न कभी दुरुपयोग होता है जैसे महिला अधिकारों से संबंधित कानून. लेकिन यह देखना चाहिए कि यह कानून लोगों के लिए कितने आवश्यक हैं. यह कानून इस समुदाय के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्रदान करते हैं. यह बदलाव इनके मूल अधिकारों को नुकसान पहुंचायेगा.
संदीप सोरेन, दुमका
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




