जाधव से मुलाकात के मायने

Updated at : 27 Dec 2017 6:56 AM (IST)
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जाधव से मुलाकात के मायने

डी भट्टाचारजी रिसर्च फेलो, आईसीडब्ल्यूए पाकिस्तान सरकार पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव बढ़ रहा है. एक तरफ, पाकिस्तान जिस तरीके से आतंकवाद का सामना करने में नाकाम रहा है, उस पर अमेरिकी प्रशासन ने नाराजगी दिखायी है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) और चीन की निधि प्रक्रिया के साथ कुछ परेशानियां और चुनौतियां हैं, जिन्हें अभी […]

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डी भट्टाचारजी

रिसर्च फेलो, आईसीडब्ल्यूए

पाकिस्तान सरकार पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव बढ़ रहा है. एक तरफ, पाकिस्तान जिस तरीके से आतंकवाद का सामना करने में नाकाम रहा है, उस पर अमेरिकी प्रशासन ने नाराजगी दिखायी है.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) और चीन की निधि प्रक्रिया के साथ कुछ परेशानियां और चुनौतियां हैं, जिन्हें अभी हल नहीं किया गया है. और फिर धार्मिक और चरमपंथी समूहों के साथ ही पाकिस्तान में कुछ आतंकवादी संगठन भी वहां मुख्यधारा के राजनीतिक दलों में शामिल हो रहे हैं, और वे पाकिस्तान की नागरिक सरकार को बहुत आसानी से चुनौती दे रहे हैं.

वहीं दूसरी तरफ, पाक में कैदी बनाकर रखे गये भारत के कुलभूषण जाधव को उनकी मां अवंती और उनकी पत्नी चेतना से मानवीय आधार पर मिलने की अनुमति देने में पाकिस्तान सरकार का अपना मानवतावादी चेहरा दिखाने का प्रयासभर ही नजर आता है. यह हो सकता है कि इससे पाकिस्तान सरकार को आनेवाले दिनों में भारत सरकार के साथ बातचीत करने का मौका बन पाये.

कुलभूषण जाधव ने इस्लामाबाद स्थित विदेश कार्यालय में इंटरकॉम पर अपनी पत्नी और मां के साथ कुल 40 मिनट तक बातचीत की. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि पाकिस्तान के पहले कायदे-आजम मुहम्मद अली जिन्ना के जन्मदिन पर ‘मानवतावादी आधार’ पर जाधव की उसके परिवार के साथ मुलाकात कराकर एक सद्भावना का संकेत दिया गया है.

विदेश कार्यालय के डॉ मोहम्मद फैजल ने कहा कि यह अपने परिवार के साथ जाधव की अंतिम बैठक नहीं होगी. डॉ फैजल ने जाधव के लिए एक चिकित्सा रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें यह लिखा है कि जाधव ‘अच्छे स्वास्थ्य’ में हैं और ‘सब कुछ सामान्य है’.

मार्च 2016 में, पाकिस्तान में एक सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनायी थी. गौरतलब है कि उस वक्त पाकिस्तान की तरफ से एकतरफा मामले के आधार पर जाधव को यह सजा सुनायी गयी थी.

भारत ने मई में इस फैसले के खिलाफ आवाज उठायी थी और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के सामने इस मामले को ले आया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने उसे फांसी पर रोक लगा दी और फरवरी-मार्च 2018 में इस मामले पर पुनर्विचार करने की बात कही. इस मामले में अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. सजा के खिलाफ जाधव की अपील को सैन्य अपीलीय अदालत ने खारिज कर दिया है और उसकी दया याचिका सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के पास महीनों से पड़ी हुई है, जिस पर बाजवा ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है.

यह बात याद रखना चाहिए कि सत्तर के दशक में, एक निर्वाचित नेता को हटाने के लिए, जुल्फिकार अली भुट्टो को किस प्रकार फांसी दी गयी थी, जबकि विश्व नेतृत्व ने उस फांसी के खिलाफ आवाज उठायी थी. अगर पाकिस्तान को लगता है कि जाधव की फांसी से उसकी कूटनीतिक हितों को मजबूती मिलेगी, तो वह कुलभूषण जाधव की सजा को पूरा करने में कोई संकोच नहीं करेगा.

हालांकि, जब 18 मई, 2017 में अंतरिम आदेश के जरिये अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने जाधव की फांसी के फैसले पर रोक लगायी थी, तब पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने यह बात कही थी कि पाकिस्तान ने सभी प्रासंगिक विभागों को अंतरराष्ट्रीय अदालत के आदेश को प्रभावी करने के निर्देश दिये हैं. यहां यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि अगर बाजवा ने जाधव की दया याचिका को खारिज कर दिया, तो जाधव अब भी राष्ट्रपति (ममनून हुसैन) से एक और दया की अपील कर सकते हैं.

मौत की सजा को पूरा करने में पाकिस्तान जल्दबाजी नहीं कर रहा है, क्योंकि सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से पहले उनकी दया अपील लंबित है. पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता डॉ मोहम्मद फैजल ने पत्रकारों को बीते 24 दिसंबर को एक ब्रीफिंग में बताया कि अगर जाधव को कौंसुलर सुविधाएं दी जाती हैं, तो फिर जाधव को दया याचिका देने में दिक्कत नहीं आयेगी और उनकी सेहत का भी भारत सरकार ध्यान रख पायेगी.

पहले भी पाकिस्तान सरकार खुद की गलतियां छुपाने के लिए अलग-अलग तरीकों से पाकिस्तान की जनता और दुनिया का ध्यान भटकाती रही है. यह मुलाकात करवाने से पाकिस्तान खुद को पाक-साफ साबित नहीं कर सकता, जब वह बिना ठोस सबूत के किसी को मौत की सजा दे रहा हो. अभी भी पाकिस्तान के शहरों से हजारों लोग लापता हो रहे हैं. हाफिज सईद खुलेआम राजनीतिक प्रचार कर रहा है और आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है. कुलभूषण जाधव पाकिस्तान सरकार के लिए वह ट्रंप कार्ड है, जो पाकिस्तान को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचायेगा.

अब आनेवाले दिनों में दो बातें ध्यान देने लायक रहेंगी. पहली बात, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इस पर क्या कदम उठाया जाता है. दूसरी बात, पाकिस्तान की बढ़ती हुई चुनौतियाें को देखकर जनरल बाजवा अब जाधव की दया याचिका पर क्या फैसला लेते हैं.

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