नये साल में नये संकल्प लें
Updated at : 26 Dec 2017 6:45 AM (IST)
विज्ञापन

कविता विकास टिप्पणीकार इस बार नये साल के उमंग में कुछ ऐसा संकल्प लें, जो नीरसता में भी सरसता का अनुभव करा दे. ऐसा तभी संभव है कि हम जीवन से प्यार करना सीख जायेंगे. सभी इंद्रियों का सचेतन अवस्था में होना मानव जीवन की एक बड़ी उपलब्धि है. इस उपलब्धि का हर्ष मनाएं. जीवन […]
विज्ञापन
कविता विकास
टिप्पणीकार
इस बार नये साल के उमंग में कुछ ऐसा संकल्प लें, जो नीरसता में भी सरसता का अनुभव करा दे. ऐसा तभी संभव है कि हम जीवन से प्यार करना सीख जायेंगे. सभी इंद्रियों का सचेतन अवस्था में होना मानव जीवन की एक बड़ी उपलब्धि है. इस उपलब्धि का हर्ष मनाएं.
जीवन के अनुराग और विराग को पूर्णतः भोगें. इस नितांत सत्य से हम मुंह नहीं मोड़ सकते कि किसी के असमय जाने या बीमारी से जूझता कोई अजीज हमें तोड़ देता है. पर, इस स्थूल शरीर से मोह करना भी तो एक भ्रम है. जितनी जल्दी इस भ्रम को समझ जायेंगे, निराशा हम पर हावी नहीं होगी.
संकल्प लेना एक चेतनशील प्राणी का लक्षण है और उसका क्रियान्वयन करना सजग होने का प्रमाण. कुछ लोग संकल्प तो बड़े-बड़े लेते हैं, पर उनका पालन करने में पिछड़ जाते हैं. इसलिए संकल्प भी अपने सामर्थ्य और साधन के अनुसार लेना चाहिए, जिसे पूरा करना हमारे वश में हो अन्यथा हताशा हाथ लगती है.
नये साल में कुछ ऐसा संकल्प लें, जिसमें प्रकृति और पर्यावरण का हित हो तथा परोपकार की भावना निहित हो. अपने घर की आया के बच्चे को एक घंटा पढ़ा दें. अपने घर के वीरान कोने में अपने हाथों से पौधारोपण करें. जब वह फूलेगा-फलेगा, तब बिल्कुल वैसी ही प्रसन्नता होगी, जैसी अपने बच्चों को बढ़ते देखकर होती है.
पेड़ लगाने का संकल्प बहुत नेक संकल्प है. इससे पर्यावरण की रक्षा होगी और अगली पीढ़ियों को एक हरे-भरे ग्रह की सौगात मिलेगी. पतझड़ में भी आपको सुंदरता दिखायी देगी, क्योंकि तब तक आप जान चुके होंगे कि कंकाल सा दिखता पेड़ भले ही कुछ समय के लिए निराशा दे दे, पर जीवन-चक्र समझा जाता है.
एक दिन मैंने एक बच्चे से कहा, ‘पिछले साल वाली गलतियां नये साल में नहीं दोहराना, प्रण करो.’ बच्चे ने मासूमियत से कहा, ‘जी मैम, इस बार नयी गलतियां करूंगा.’ बच्चे ने एक शाश्वत सच को याद दिला दिया कि गलतियां करना तो स्वाभाविक है, पर बार-बार एक ही गलती न हो, इसे हमें जरूर देखना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध हमारे स्वभाव से जुड़ा है, जो हमें विषाद की स्थिति में ला सकता है.
आप जरा याद कीजिए, अंतिम बार कब आपने बालकनी से ढलते सूरज का नजारा आंखों में कैद किया था?
कब बिटिया के पैरों को गाल से टिकाकर पुलकित हुए थे? गली में खेलते बच्चों की फौज ने आपके आंगन में आयी गेंद मांगी, और आपने प्यार से झिड़कते हुए एक बॉलर की तरह उनकी ओर गेंद फेंकी, कब? किसी की जुल्फों को देख कॉलेज के दिनों में कसा हुआ एक जुमला क्या अब याद आता है?
नहीं न! दौड़-भाग और तनाव भरी जिंदगी में हंसने के लिए वक्त नहीं. तो, इस साल किसी अपने के साथ उन स्थानों पर जाएं, जहां से आपकी यादें जुड़ी हों. अपने कुछ सच्चे मित्रों के साथ कुछ वक्त गुजारें, जो एक-दूजे के हमराज थे और बीती बातों को याद करके खूब ठहाके लगाएं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




