परंपरागत सरकारी कार्रवाई
Updated at : 21 Aug 2017 6:19 AM (IST)
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जब सीएम योगी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गोरखपुर में 72 बच्चों की मृत्यु पर बोल रहे थे कि जांच में दोषी पाये गये एक भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जायेगा, तो सोचा शायद यह पार्टी विथ डिफरेंस की सरकार है. शायद वहां के स्वास्थ्य मंत्री को ना सिर्फ बर्खास्त किया जायेगा, बल्कि 72 बच्चों […]
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जब सीएम योगी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गोरखपुर में 72 बच्चों की मृत्यु पर बोल रहे थे कि जांच में दोषी पाये गये एक भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जायेगा, तो सोचा शायद यह पार्टी विथ डिफरेंस की सरकार है.
शायद वहां के स्वास्थ्य मंत्री को ना सिर्फ बर्खास्त किया जायेगा, बल्कि 72 बच्चों की मृत्यु का दोषी ठहराते हुए उन्हें जेल भेजा जायेगा, मगर जिला मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट में तो वही ढाक के तीन पात निकला. डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, क्लर्क एवं गैस आपूर्तिकर्ता पुष्पा सेल्स को दोषी ठहरा दिया गया. सत्ता में मायावती या अखिलेश या कांग्रेस होती, तो भी यही होता. योगीजी परंपरावादी राजनीतिज्ञ से अलग कहां हुए? भाजपा सरकार की कथनी भले ही अलग हो, करनी वही है.
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी
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