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ranchi

  • Jun 12 2019 11:50AM
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झारखंड : भीमा कोरेगांव मामले में फादर स्टेन स्वामी के आवास पर महाराष्ट्र पुलिस ने मारा छापा

झारखंड : भीमा कोरेगांव मामले में फादर स्टेन स्वामी के आवास पर महाराष्ट्र पुलिस ने मारा छापा

रांची/पुणे : झारखंड के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के आवास पर महाराष्ट्र एटीएस की टीम ने छापमारी की है. मंगलवार की शाम रांची पहुंची महाराष्ट्र एटीएस की टीम ने बुधवार सुबह सात बजे स्थानीय थाना की मदद से नामकुम थाना क्षेत्र के बगीचा स्थित फादर स्टेन स्वामी के आवास पर छापा मारा. उनके आवास की तलाशी ली गयी. काफी देर तक फादर स्वामी से एक बंद कमरे में पूछताछ की गयी.

पूरा मामला भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा से जुड़ा है. इस मामले में फादर स्टेन स्वामी के घर दूसरी बार छापा पड़ा है. उनके आवास के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है. बताया जाता है कि महाराष्ट्र एटीएस की टीम ने स्वामी के घर से कई सामान जब्त किये हैं. मूल रूप से केरल के रहने वाले स्टेन स्वामी के आवास पर अगस्त, 2017 में पुणे पुलिस ने छापामारी की थी. तब पुलिस ने उनके घर से लैपटॉप, कम्प्यूटर सहित कई कागजात जब्त किये थे.

भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी, 2018 को कथित रूप से स्टेन स्वामी व अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण दिया था, इसी मामले में फादर स्टेन के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था. आरोप है कि स्टेन स्वामी महाराष्ट्र के नक्सली संगठन एलगार परिषद को समर्थन दिया.

पुणे पुलिस के अनुसार, एलगार परिषद मामले में जारी जांच के तहत यह छापेमारी की गयी. इस मामले में माओवादियों से कथित संबंध के सिलसिले में नौ कार्यकर्ताओं को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस ने बताया कि स्वामी को अभी हिरासत में नहीं लिया गया है.

मामला 31 दिसंबर, 2017 को हुए एलगार परिषद सम्मेलन से जुड़ा है. पुलिस का आरोप है कि इस सम्मेलन के लिए माओवादियों ने धन खर्च किया था. पुलिस के आरोप पत्र के अनुसार, इस सम्मेलन में कुछ कार्यकर्ताओं ने भड़काऊ भाषण दिये थे, जिसके अगले दिन पुणे के पास कोरेगांव-भीमा गांव में हिंसा हुई थी.

पुणे पुलिस ने नौ कार्यकर्ताओं सुधीर धावले, शोमा सेन, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, रोना विल्सन, वर वर राव, अरुण फेरेरा, सुधा भारद्वाज और वरर्नोन गोंजाल्विस के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया हुआ है. इस आरोप पत्र में फरार माओवादी नेता दीपक उर्फ मिलिंद तेलतुम्बड़े, किशनदा उर्फ प्रशांत बोस, प्रकाश उर्फ रितुपर्ण गोस्वामी, सीपीआई (माओवादी) महासचिव गणपति उर्फ चंद्रशेखर का भी नाम है.

इन लोगों पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और अपने प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा को फैलाने के साथ समाज में जातीय संघर्ष और घृणा फैलाने का भी आरोप है. पुलिस के अनुसार, इन सभी लोगों पर कठोर कहे जाने वाले गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी कार्रवाई की गयी है.

क्या है भीमा कोरेगांव मामला?

भीम कोरेगांव महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित छोटा सा गांव है. 1 जनवरी, 1818 को ईस्ट इंडिया कपंनी की सेना ने बाजीराव पेशवा द्वितीय की बड़ी सेना को कोरेगांव में हरा दिया था. भीमराव आंबेडकर के अनुयायी इस लड़ाई को राष्ट्रवाद बनाम साम्राज्यवाद की लड़ाई नहीं मानकर, दलितों की जीत बताते हैं. उनके मुताबिक, लड़ाई में दलितों पर अत्याचार करने वाले पेशवा की हार हुई थी.

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हर साल 1 जनवरी को दलित समुदाय के लोग भीमा कोरेगांव में जमा होते हैं. ‘विजय स्तंभ’ के सामने. इसे अंग्रेजों ने पेशवा को हराने वाले जवानों की याद में बनाया था. वर्ष 2018 में युद्ध के 200वें साल का जश्न मनाने के लिए भारी संख्या में दलित समुदाय के लोग जमा हुए थे.

जश्न के दौरान दलित और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गयी. झड़प में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गयी, जबकि कई लोग घायल हो गये थे. यहां दलित और बहुजन समुदाय के लोगों ने एल्गार परिषद के नाम से शनिवार वाड़ा में कई जनसभाएं कीं. कहते हैं कि हिंदुत्व राजनीति के खिलाफ कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण दिये, जिसके बाद यहां हिंसा भड़क उठी. भाषण देने वालों में स्टेन स्वामी भी थे.

कौन हैं स्टेन स्वामी


मूल रूप से केरल के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी करीब पांच दशक से झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. उन्होंने विस्थापन, भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों को लेकर संघर्ष किया है. उग्रवादी के नाम पर जेल में बंद 3,000 विचाराधीन लोगों के मानवाधिकार के लिए केस भी दर्ज किया है. लंबे अरसे तक वह सिंहभूम में सक्रिय रहे. वर्ष 2004 से रांची के नामकुम स्थित बगीचा में रह रहे हैं.

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