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ranchi

  • Mar 18 2019 12:16PM
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नहीं रहे झारखंड आंदोलन के सबसे लोकप्रिय नेता लाल रणविजय नाथ शाहदेव

नहीं रहे झारखंड आंदोलन के सबसे लोकप्रिय नेता लाल रणविजय नाथ शाहदेव

रांची : अलग झारखंड राज्य के लिए आंदोलन करने वाले सबसे लोकप्रिय नेता लाल रणविजय नाथ शाहदेव का सोमवार को रांची में निधन हो गया. शाम चार बजे हरमू मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा. झारखंड के इस लाल ने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. गुमला के पालकोट में नागवंशी परिवार में जन्मे लाल रणविजय नाथ शाहदेव बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे.

उन्होंने चार दशक तक वकालत की. कविता, कहानियां लिखते थे. आंदोलन के लिए नारे (स्लोगन) भी लिखते थे. झारखंड आंदोलनकारियों में सबसे लोकप्रिय लाल रणविजय नाथ शाहदेव मरते समय तक झारखंड पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष थे.

झारखंड पार्टी के संस्थापक एनई होरो के साथी लाल रणविजय नाथ शाहदेव ने निजी हित के लिए कभी किसी दूसरी पार्टी का रुख नहीं किया. जयपाल सिंह मुंडा ने जब अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया, तब भी वह झारखंड पार्टी के साथ बने रहे. एनई होरो के साथ मिलकर उन्होंने पार्टी को जीवंत रखा.

पेशे से वकील लाल रणविजय नाथ शाहदेव कवि और लेखक तो थे ही, उनके अंदर एक कलाकार भी छिपा था. नागपुरी में कविताएं लिखते थे, गीत भी गाते थे. सिद्धांतों से समझौता नहीं करने की वजह से ही वह झारखंड के सबसे सम्मानित आंदोलनकारियों में गिने जाते थे. लंबे अरसे से वह बीमार चल रहे थे. पिछले साल ही पैरालाइसिस अटैक आया था और तब से बीमार थे. अंतिम दिनों में उनकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी.

लाल रणविजय शाहदेव 60 के दशक में ही झारखंड आंदोलन से जुड़ गये थे. आंदोलनकारियों को प्रेरित करने के लिए वह नागपुरी कविताएं और स्लोगन (नारा) लिखा करते थे. अलग राज्य के लिए आवाज बुलंद करने के लिए बनी पार्टी झारखंड पार्टी से एक बार जुड़ गये, तो फिर कभी उससे अलग नहीं हुए.


मूल रूप से गुमला के पालकोट के रहने वाले लाल रणविजय ने रांची विश्वविद्यालय और छोटानागपुर लॉ कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की. वकालत की पढ़ाई करनेके बाद उन्होंने 40 साल तक वकालत की.

अपनी पार्टी के प्रति समर्पण और सिद्धांतों से समझौता नहीं करने वाले लाल रणविजय नाथ शाहदेव की दूसरी पार्टियों के नेता भी इज्जत करते थे. नागवंशी राजघराने से ताल्लुक रखने वाले स्व शाहदेव की झारखंड के रंगकर्मी भी काफी सम्मान करते थे. थे. ज्ञात हो कि झारखंड में करीब 2000 साल तक शासन करने वाले नागवंशी परिवार का यह वंशज बेहद तंगी में जी रहा था.

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल नाथ शाहदेव ने लाल रणविजय के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीति में आने वाली पीढ़ियों को वह लंबे समय तक प्रेरित करते रहेंगे. वह एक ऐसे शख्स थे, जिन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया.

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