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  • Jan 22 2018 1:05PM

बढ़ रही है अमीर और गरीब के बीच की खाई, WEF समिट से पहले ऑक्सफैम ने दिखायी भयावह तस्वीर

बढ़ रही है अमीर और गरीब के बीच की खाई, WEF समिट से पहले ऑक्सफैम ने दिखायी भयावह तस्वीर

दावोस : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम की बैठक को संबोधित करने के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो चुके हैं. अपने संबोधन में वह भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था का जिक्र करेंगे. व्यापार जगत की शीर्ष हस्तियों को आश्वस्त करेंगे कि भारत तेजी से बदल रहा है. सरकार सबसे पिछड़े लोगों की समृद्धि के लिए काम कर रही है. फोरम में ‘बढ़ती आय’ और ‘लिंग असामनता’ पर अहम चर्चा होगी. इस सम्मेलन से पहले इंटरनेशनल राइट्स ग्रुप ऑक्सफैम आवर्स की ‘रिवॉर्ड वर्क नॉट वेल्थ’ सर्वे ने जो रिपोर्ट पेश की है, दावोस में उससे जुड़े सवालों का जवाब देना भारत के प्रधानमंत्री के लिए कठिन हो सकता है.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल भारत के कुल धन में 73 फीसदी धन महज एक फीसदी अमीरों के पास था. 67 करोड़ आबादी गरीब थी. इनकी आय में मात्र एक फीसदी की वृद्धि हुई. यह भी कहा गया था कि भारत के एक फीसदी अमीरों की आबादी देश की कुल धन का 58 फीसदी उत्पन्न करती है, जो वैश्विक स्तर पर 50 फीसदी से भी ज्यादा है. सर्वे के अनुसार, दुनिया भर में यह स्थिति और भयावह है. दुनिया भर में संकलित कुल आय में 82 फीसदी योगदान अमीरों का है, जबकि 3.7 अरब की आबादी का इसमें कोई हाथ नहीं है.


‘रिवॉर्ड वर्क नॉट वेल्थ’ नाम से जारी सर्वे में कहा गया है कि किस तरह से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमीरों का ही योगदान है, जबकि सैकड़ों मिलियन की गरीब आबादी किसी तरह बस अपना जीवन यापन कर रही है. वर्ष 2017 की रिपोर्ट में ये बात सामने आयी थी कि हर दो दिन में एक अरबपति बन रहा है. वर्ष 2010 से ही अरबपतियों का धन 13 फीसदी की दर से बढ़ा है. अध्ययन में कहा गया है कि भारत में अमीरों की आय के बराबर कमाने में मिडिल क्लास के लोगों को 941 साल लग जायेंगे.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में अमीरों की संपत्ति तेजी से बढ़ रही है. लगातार बढ़ रही है. वहीं, करोड़ों लोग दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. मशक्कत कर रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2017 में हर दो दिन में एक अरबपति पैदा हुआ. वर्ष 2010 के बाद से अरबपतियों की संपत्ति 13 फीसदी की दर से बढ़ रही है. यह श्रमिकों के वेतन से छह फीसदी ज्यादा है.


ऑक्सफैम इंडिया की सीईओ निशा अग्रवाल ने कहा है कि भारत में आर्थिक विकास का लाभ कुछ ही लोगों को मिल रहा है. यह चिंता की बात है. उन्होंने कहा कि अरबपति की संख्या में बढ़ोत्तरी संपन्न अर्थव्यवस्था का संकेत नहीं है. यह असफल आर्थिक व्यवस्था का एक लक्षण है. उन्होंने कहा कि बढ़ता विभाजन लोकतंत्र को कमजोर करता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है. इतना ही नहीं, भारत में 10 अरबपतियों में 9 पुरुष हैं, जो बताता है कि यहां कितना लैंगिक भेदभाव है. भारत में केवल चार महिला अरबपति हैं. इनमें से तीन को यह संपत्ति विरासत में मिली है.

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