Advertisement

khabro ki khabar

  • Aug 2 2015 6:00AM

सिंगापुर तक थी भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की धूम

सिंगापुर तक थी भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की धूम

लोकनाट्य के प्रवर्तक व भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर ने अपनी नाट्य शैली से समाज की कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया. वहीं, लोगों को जागरूक करने में भी भिखारी ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही. लोक कलाकार भिखारी ठाकुर नवजागरण की उन्नत अवस्था के बेहद लोकप्रिय कलाकार थे. 

उनमें जनता के दर्द को समझने की अद्भुत क्षमता थी. अपने नाटकों के माध्यम से बाल विवाह, रोजगार के लिए पलायन, नशाखोरी जैसी कुरीतियों पर प्रहार करनेवाले भिखारी ठाकुर का जन्म सदर प्रखंड के कुतुबपुर दियारा स्थित कोटवा पट्टी गांव में 18 दिसंबर, 1887 को हुआ था.

छपरा/दिघवारा : भिखारी ने सामाजिक रूढ़ियों के प्रति लोगों को जगाने के लिए न केवल नाटक लिखा, बल्कि उनका मंचन अपनी मंडली के साथ किया. उनकी नाट्य मंडली की कृति देश से लेकर सिंगापुर तक फैली थी. शहर के बाहरी छोर पर उनकी मंडली के साथ प्रतिमा बनी है. गांव में उनके नाम पर पुस्तकालय स्थापित है. काफी गहरा था यथार्थ बोध. भोजपुरी के विभूति व लोक संस्कृति के वाहक भिखारी भोजपुरी भाषा-भाषियों के हृदय में पूरी तरह बसनेवाले शायद एकमात्र ऐसे लोकप्रिय रचनाकार थे,

जिन्होंने न सिर्फ भारतीय ग्रामीण समाज में फैली कुरीतियों के विरुद्ध अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति के बल पर बिगुल फूंका. बल्कि भोजपुरी क्षेत्र के लोगों को स्वस्थ मनोरंजन प्रदान करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास किया. उन्होंने अनपढ़ होते हुए भी दलित चेतना के लिए सराहनीय कार्य किया. उन्होंने न तो कोई औपचारिक शिक्षा ली थी और न किसी स्कूलों में दाखिला भी लिया था. मगर अपनी व्यवहार कुशलता से लोगों के अंदर अपनी प्रभावशाली पैठ बनायी.

- इन विषयों पर किया प्रहार : बाल विवाह, रोजगार के लिए पलायन, नशाखोरी, विधवा विवाह, बाल विवाह

- प्रमुख रचनाएं : बेटी बेचवा, गबरघिचोर, विधवा विलाप, कलियुग प्रेम, नाई बहार

- सर्वाधिक उत्कृष्ट रचनाएं : बिदेसिया,

- प्रमुख लोक नाटक : ननद-भौजाई, पुत्र-वधू

- इन उपमाओं से हुए अलंकृत : अनपढ़ हीरा, भोजपुरी का शेक्सपियर

भिखारी के नाम पर हुए काम

बिहार राज्य भाषा परिषद् ने भिखारी की  सभी रचनाओं का संकलन भिखारी ठाकुर रचनावली के नाम से प्रकाशित किया है. लोकप्रिय गायिका कल्पना ने भी भिखारी के आठ गीतों को ‘लिजेंट ऑफ भिखारी ठाकुर’ नामक अलबम में गाया है. राहुल सांकृत्यायन ने उन्हें भोजपुरी का अनपढ़ हीरा कहा. जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा सहित कई विश्वविद्यालयों में भोजपुरी की पढ़ाई शुरू होने के साथ भिखारी ठाकुर की रचनाओं को सिलेबस में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है. भोजपुरी नाटकों पर आधारित फिल्में भी प्रदर्शित होने लगी है.

 

Advertisement

Comments

Other Story

Advertisement