बोरवेल से मासूम को सकुशल निकालने वाली टीम का बिहटा में हुआ सम्मान, NDRF के जवान सम्मानित हुए

Author Monu kumar|Edited by Rajeev Kumar
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एनडीआरएफ जवान के गोद में बच्चा

एनडीआरएफ जवान के गोद में बच्चा

गया में 31 घंटे तक चले बोरवेल रेस्क्यू में तीन वर्षीय मासूम पीयूष को सकुशल निकालने वाले एनडीआरएफ के जांबाज जवानों को बिहटा मुख्यालय में सम्मानित किया गया. इस साहसिक कार्य के लिए टीम की विशेष सराहना की गई.

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Patna News : गया के फतेहपुर के रगुन गांव में बोरवेल में गिरे तीन वर्षीय मासूम पीयूष को सुरक्षित बाहर निकालने वाले एनडीआरएफ की 9वीं वाहिनी, बिहटा के अधिकारियों और जवानों को शनिवार को वाहिनी मुख्यालय में सम्मानित किया गया. इस अवसर पर रेस्क्यू अभियान में शामिल सभी अधिकारियों और जवानों के साहस, धैर्य, तकनीकी दक्षता तथा त्वरित कार्रवाई की सराहना की गई.

31 घंटे तक चला बचाव अभियान

अधिकारियों ने बताया कि पीयूष को बचाने का अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था. विषम परिस्थितियों में जवानों ने लगातार 31 घंटे तक बिना रुके बचाव कार्य किया और अंततः बच्चे को सकुशल बाहर निकालने में सफलता हासिल की. अभियान के दौरान आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग करते हुए पूरी सावधानी बरती गई.

16 जुलाई की शाम 300 फीट बोरवेल में गिरा था मासूम

जानकारी के अनुसार, 16 जुलाई की शाम करीब सात बजे गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के रगुन गांव में तीन वर्षीय पीयूष एक अप्रयुक्त नल-जल योजना के करीब 300 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था. सूचना मिलने पर जिला प्रशासन ने एनडीआरएफ की 9वीं वाहिनी, बिहटा से मदद मांगी. इसके बाद टीम आवश्यक उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई.

ऑक्सीजन पहुंचाकर शुरू किया गया रेस्क्यू

घटनास्थल पर पहुंचने के बाद एनडीआरएफ के जवानों ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के साथ समन्वय स्थापित कर बचाव अभियान शुरू किया. सबसे पहले बोरवेल में फंसे बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था की गई, ताकि उसे सांस लेने में कोई परेशानी न हो. इसके बाद विशेष रेस्क्यू तकनीकों की मदद से बच्चे तक पहुंचने का प्रयास किया गया.

प्रशस्ति पत्र देकर बढ़ाया जवानों का उत्साह

सम्मान समारोह में अधिकारियों ने कहा कि एनडीआरएफ के जवान हर आपदा की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ राहत एवं बचाव कार्य करते हैं. पीयूष रेस्क्यू अभियान टीमवर्क, बेहतर समन्वय और जवानों की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है. इस अवसर पर अभियान में शामिल सभी अधिकारियों और जवानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया तथा भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ सेवा देने के लिए उनका उत्साहवर्धन किया गया.

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