Viral Video : OMG! दिल हाथ में आ जाएगा, अगर आपने देख लिया ये वीडियो

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 21 Aug 2025 12:18 PM

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प्रार्थना करता बच्चा और उसका पालतू कुत्ता

Viral Video : सोशल मीडिया के युग में वायरल होने के लिए लोग तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं, लेकिन एक बच्चा जब अपनी मासूमियत से प्रार्थना करता है, तो वह खुद ही वायरल हो जाता है और उसे लोग-लोग बार-बार देखना चाहते हैं. आप भी देखें, कैसे एक मासूम बच्चा अपने कुत्ते के साथ प्रार्थना कर रहा है.

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Viral Video : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को आज एक डाॅग लवर ने तमाचा जड़ दिया है. तमाचा जड़ने वाला व्यक्ति कुत्तों के प्यार में था इसलिए उसने ऐसी हरकत की. लेकिन कुत्तों से प्यार है तो मुख्यमंत्री को तमाचा मारने से अच्छा है, उनकी सुरक्षा के लिए इस तरह से प्रार्थना करना. जी हां, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक 6-7 साल का एक बच्चा अपने कुत्ते के साथ दुनिया के सभी कुत्तों की खुशहाली के लिए प्रार्थना कर रहा है. इस वीडियो को अबतक 1.9 मिलियन लोगों ने देखा है.

कुत्ता कर रहा हाथ जोड़कर प्रार्थना

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में एक बच्चा है और उसका पालतू कुत्ता है. दोनों ही बहुत प्यारे दिख रहे हैं. वीडियो में बच्चा अंग्रेजी में यह कहता है कि हम आज दुनिया के सभी कुत्तों के लिए प्रार्थना करेंगे. ऐसा कहकर वह अपने पीछे स्लाइडर पर फिसल रहे अपने पालतू कुत्ते को आवाज लगाता है-ब्लू लेट्‌स प्रे, यानी ब्लू आओ प्रार्थना करें.

https://x.com/emma6USA/status/1956732932099543459

कुत्तों के लिए मांगा बेहतर स्वास्थ्य

वायरल वीडियो में बच्चा जब अपने पालतू कुत्ते को अपने पास बुलाता है और उससे कहता है कि चलो प्रार्थना करें, तो कुत्ता सामने के अपने दोनों पैरों को उठाकर बच्चे की जांघ पर रख देता है और हाथ जोड़ने जैसे करके सिर भी झुका लेता है. बच्चा भी उसी तरह अपने दोनों हाथों को जोड़कर दुनिया के सभी कुत्तों के लिए बेहतर स्वास्थ्य की मांग ईश्वर से करता है. यह करते हुए बच्चा और कुत्ते दोनों बहुत ही प्यारे लगते हैं. यह वीडियो भारत का नहीं है, लेकिन बच्चा हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहा है. इस वीडियो को 1.9 मिलियन लोगों ने देखा है और 78 हजार लाइक्स मिले हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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