उत्तराखंड: कब सिलक्यारा सुरंग से बाहर आएंगे मजदूर! जानें क्या है ताजा अपडेट
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 23 Nov 2023 4:34 PM
यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रही सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को यानी दिवाली के दिन ढह गया था. पिछले 11 दिनों से 41 श्रमिक उसके अंदर फंसे हुए हैं जिन्हें निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है. जानें क्या है ताजा अपडेट
उत्तराखंड की निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग ढहने के बाद से पूरे देश में मजदूरों के लिए दुआ मांगी जा रही है. इस सुरंग में 41 मजदूर फंसे हुए हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे ने गुरुवार को कहा कि उत्तराखंड सुरंग दुर्घटना बचाव अभियान 12-14 घंटों में पूरा होने की संभावना है. फंसे हुए 41 मजदूरों तक पहुंचने के बाद उन्हें एक-एक करके बाहर निकालने में तीन घंटे और लग सकते हैं. आपको बता दें कि यह पहली बार है जब बचाव अधिकारियों ने श्रमिकों के बचाव के लिए समय सीमा की घोषणा की है. वरिष्ठ अधिकारी ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि बचावकर्मियों ने लोहे की जाली हटा दी जो ड्रिलर्स का रास्ता रोकने का काम कर रही थी. लोहे की जाली के कारण बचाव अभियान में कई घंटों की देरी हुई. हमें इसे हटाने में छह घंटे लग गए, लेकिन अच्छी खबर यह है कि हम 45 मीटर तक की ड्रिलिंग के बाद आई बाधा को दूर करने में सफल रहे. उन्होंने कहा कि बचावकर्मी पाइपों की वेल्डिंग कर रहे हैं और जल्द ही ड्रिलिंग शुरू हो जाएगी.
#WATCH | Uttarkashi (Uttarakhand) tunnel rescue | Former advisor to PMO, Bhaskar Khulbe says "…In the next 14-15 hours, we will be able to cross the 60-metre mark. It will take 12-14 hours more for us to reach the spot where the workers are trapped and then it can take 2-3… pic.twitter.com/8KU8XrhaY9
— ANI (@ANI) November 23, 2023
यहां चर्चा कर दें कि दिवाली की सुबह यह हादसा हुआ जिसके बाद से राहत बचाव कार्य जारी है. सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था. पिछले 11 दिनों से 41 श्रमिक उसके अंदर फंसे हुए हैं जिन्हें निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी है. बचाव कार्य की निगरानी कर रहे प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे ने ताजा घटनाक्रम को लेकर मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि लोहे के सरिये के कारण उत्पन्न समस्या को दूर करने में सफलता मिली है. गैस कटर का इस्तेमाल कर सरिये को काट दिया गया है. आगे खुल्बे ने कहा कि बुधवार शाम मलबे के 45 मीटर अंदर तक ड्रिलिंग पूरी कर ली गयी थी लेकिन उसके बाद मलबे में लोहे का सरिया मिलने से पांच-छह घंटे काम रुक गया था.
अभियान के पूरा होने की समयसीमा का अनुमान लगाना उचित नहीं
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से कहा गया है कि उत्तराखंड में सुरंग में फंसे लोगों को बचाने संबंधी अभियान के पूरा होने की समयसीमा का अनुमान लगाना उचित नहीं है. सुरंग से श्रमिकों को बचाने के लिए की जा रही ‘ड्रिलिंग’ में तीन-चार और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को कुछ घंटों में या शुक्रवार सुबह तक बाहर निकाल लिए जाने की संभावना है. उत्तराखंड के सिलक्यारा में सुरंग स्थल पर 41 एम्बुलेंस तैनात हैं.
सुरंग के अंदर कैसे जीवित हैं मजदूर
इस बीच जो अच्छी खबर आई वह यह है कि मजदूरों को ऑक्सीजन, भोजन, पानी, दवाइयां तथा अन्य सामान पहुंचाया जा रहा है. सोमवार को डाली गयी पाइपलाइन के जरिए लगातार ये सामाग्री मजदूरों तक पहुंच रही है जिससे वे सुरंग के अंदर जीवित रहने में सक्षम हैं. सिलक्यारा में फंसे श्रमिकों के परिजनों ने उम्मीद जताई कि बचाव कार्य 23 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा.
बचाव के बाद की योजना तैयार
उत्तरकाशी प्रशासन और अन्य एजेंसियों ने 12 दिनों से सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों को बचाने के बाद की योजना तैयार कर रखी है. उत्तरकाशी के एसपी अर्पण यदुवंशी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए बताया कि हमारी बचाव कार्य योजना तैयार है. हमें उन्हें (बचाए गए श्रमिकों को) कहां ले जाना है, कैसे ले जाना है, इसको लेकर योजना तैयार है. प्रशासन ने 41 एम्बुलेंस की व्यवस्था की है जो सुरंग के बाहर इंतजार कर रही हैं.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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