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वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर पारदर्शी तरीके से लिया गया कोविशील्ड का अंतराल बढ़ाने का निर्णय, NTAGI प्रमुख ने कही यह बात

Updated at : 16 Jun 2021 2:51 PM (IST)
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वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर पारदर्शी तरीके से लिया गया कोविशील्ड का अंतराल बढ़ाने का निर्णय, NTAGI प्रमुख ने कही यह बात

नयी दिल्ली : सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड (Covishield) के दो डोज के बीच का अंतराल बढ़ाने के मामले में केंद्र सरकार सवालों के घेरे में है. कुछ लोग इसे वैक्सीन की कमी से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ इसे सरकार की नाकामी तक बता रहे हैं. इन सब के बीच एनटीएजीआई (NTAGI) के अध्यक्ष एन के अरोड़ा ने कहा कि कोविशील्ड की दो खुराक के बीच अंतराल बढ़ाने का निर्णय वैज्ञानिक साक्ष्य पर आधारित था और पारदर्शी तरीके से लिया गया था.

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नयी दिल्ली : सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड (Covishield) के दो डोज के बीच का अंतराल बढ़ाने के मामले में केंद्र सरकार सवालों के घेरे में है. कुछ लोग इसे वैक्सीन की कमी से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ इसे सरकार की नाकामी तक बता रहे हैं. इन सब के बीच एनटीएजीआई (NTAGI) के अध्यक्ष एन के अरोड़ा ने कहा कि कोविशील्ड की दो खुराक के बीच अंतराल बढ़ाने का निर्णय वैज्ञानिक साक्ष्य पर आधारित था और पारदर्शी तरीके से लिया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस फैसले पर टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के सदस्यों की राय एक थी. इस बात को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी कहा गया है. सरकार ने 13 मई को कहा था कि उसने कोविड-19 वर्किंग ग्रुप की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है और कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराक के बीच के अंतर को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह कर दिया है.

मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि यह बदलाव ब्रिटेन से आये उपलब्ध रियल लाइफ एविडेंस के आधार पर किया गया. COVID-19 वर्किंग ग्रुप कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराक के बीच खुराक अंतराल को 12-16 सप्ताह तक बढ़ाने के लिए सहमत हुआ. कोवैक्सीन को लेकर ऐसी कोई सिफारिश नहीं की गयी, इसलिए उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया. मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 वर्किंग ग्रुप की सिफारिश को नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19 (NEGVAC) द्वारा स्वीकार किया गया, जिसकी अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने 12 मई, 2021 को की.

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नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने भी इस अंतर को बढ़ाने के पीछे का कारण बताते हुए कहा था कि यह एनटीएजीआई की सिफारिशों पर लिया गया विज्ञान आधारित निर्णय था. उन्होंने कहा कि अध्ययनों के अनुसार, शुरू में, कोविशील्ड की दो खुराक के बीच का अंतराल चार से छह सप्ताह का था, लेकिन फिर जैसे-जैसे अधिक डेटा उपलब्ध हुआ, द्वितीयक विश्लेषण से पता चला कि खुराक के अंतराल को 4 से 8 सप्ताह तक बढ़ाने से कुछ फायदा हो सकता है.

पॉल ने कहा कि यूके ने उस समय तक इसे 12 सप्ताह तक बढ़ा दिया था और डब्ल्यूएचओ ने भी यही कहा था. लेकिन कई देशों ने खुराक के पैटर्न में बदलाव नहीं किया है. उस समय, हमारी विज्ञान-आधारित तकनीकी समिति ने उपलब्ध आंकड़ों को देखते हुए अंतराल को नहीं बढ़ाया था. बाद में बिना किसी दबाव के बार-बार समीक्षा के बाद समिति ने खुराक के अंतराल को बढ़ाकर 12-16 सप्ताह किया गया. यह निर्णय वास्तव में यूके को देखते हुए और वैज्ञानिक आधारों पर लिया गया है.

डॉ पॉल ने कहा कि एनटीएजीआई एक स्थायी समिति है, जिसका गठन कोविड​​-19 के उभरने से बहुत पहले किया गया था. यह बच्चों के लिए टीकाकरण पर काम करता है. पॉल ने कहा था कि यह वैज्ञानिक आंकड़ों को देखता है और हमें इस संस्था के निर्णय का सम्मान करना चाहिए. वे स्वतंत्र निर्णय लेते हैं. हमारी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं में विश्वास रखें. एनटीजीएआई उच्च सत्यनिष्ठा वाले व्यक्तियों का समूह है.

Posted By: Amlesh Nandan.

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