स्वयं प्रकाश स्मृति सम्मान के लिए ‘कीर्तिगान‘ का चयन, कथाकार चंदन पांडेय ने कहा- नि:संदेह सम्मान खुशी देता है

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 15 Sep 2023 5:14 PM

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चंदन पांडेय ने बताया कि ‘कीर्तिगान’ उपन्यास देश में हो रही माॅब लिंचिंग की घटनाओं पर आधारित है. इस उपन्यास में कीर्तिगान एक मीडिया हाउस है, जो देश में हो रही माॅब लिंचिंग की घटनाओं के पीड़ितों से मिलकर उनपर एक रिपोर्ट तैयार करना चाहता है.

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‘मेरा ऐसा मानना है कि किसी पुरस्कार या सम्मान का लेना या देना लेखक और किसी संस्थान के बीच म्यूचल अंडरस्टैंडिंग का मामला है. जब कोई संस्थान किसी लेखक को सम्मान देता है, तो वो उसके लेखन से खुद को एसोसिएट करता है और यही बात उस लेखक पर भी लागू होती है. नि:संदेह सम्मान मिलने से खुशी होती है. उक्त बातें स्वयं प्रकाश स्मृति सम्मान दिए जाने की घोषणा के बाद कथाकार चंदन पांडेय ने प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में कही.

माॅब लिंचिंग की घटनाओं पर आधारित है उपन्यास

चंदन पांडेय ने बताया कि ‘कीर्तिगान’ उपन्यास देश में हो रही माॅब लिंचिंग की घटनाओं पर आधारित है. इस उपन्यास में कीर्तिगान एक मीडिया हाउस है, जो देश में हो रही माॅब लिंचिंग की घटनाओं के पीड़ितों से मिलकर उनपर एक रिपोर्ट तैयार करना चाहता है. इसके लिए सनोज और सुनंदा नाम के पत्रकार की टीम तैयार की जाती है जिनपर इस काम को अंजाम देने का जिम्मा होता है. वे दोनों माॅब लिंचिंग के पीड़ितों से मिलते हैं और फिर उनपर उन घटनाओं का जो प्रभाव होता है, उसके आसपास यह उपन्यास बुना गया है. साथ ही स्त्री-पुरुष के असहज संबंध पर भी यह उपन्यास आधारित है. इस उपन्यास में वास्तविक घटनाओं से पात्रों को जोड़ा गया है.

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स्वयं प्रकाश स्मृति न्यास ने सम्मान दिये जाने की घोषणा की

साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत संस्थान ’स्वयं प्रकाश स्मृति न्यास’ ने सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वयं प्रकाश की स्मृति में दिए जाने वाले वार्षिक सम्मान की घोषणा कर दी है. न्यास द्वारा जारी विज्ञप्ति में डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मान में इस बार उपन्यास विधा के लिए सुपरिचित कथाकार चंदन पांडेय के उपन्यास कीर्तिगान का चयन किया गया है. पिछले साल यह सम्मान शिरीष खरे को उनके उपन्यास ‘ एक देश, बारह दुनिया’ के लिए दिया गया था.

तीन सदस्यीय टीम ने किया चयन का निर्णय

सम्मान के लिए तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल ने सर्वसम्मति से इस संग्रह को वर्ष 2023 के लिए चयनित करने की अनुशंसा की है. निर्णायक मंडल के वरिष्ठतम सदस्य काशीनाथ सिंह (वाराणसी) ने अपनी संस्तुति में कहा कि यह उपन्यास एक युवा कथाकार की बड़ी संभावनाओं को उजागर करता है. उन्होंने कहा कि उनका लेखन हमारे देशकाल के जटिल और मनुष्यविरोधी यथार्थ का सम्यक उद्घाटन करता है. निर्णायक मंडल के दूसरे सदस्य कवि-कथाकार राजेश जोशी (भोपाल) ने संस्तुति में कहा कि चंदन पांडेय का गद्य लेखन स्वयं प्रकाश के सरोकारों और संकल्पों की याद दिलाता है. उन्होंने कहा कि कहानी के बाद अपने दो उपन्यासों से चंदन ने अपने लेखन की प्रतिबद्धता दर्शाई है. तीसरे निर्णायक कवि-गद्यकार प्रियदर्शन (दिल्ली) ने चंदन पांडेय के उपन्यास कीर्तिगान की अनुशंसा में कहा कि हमारे समकालीन मुद्दों और विडंबनाओं को यह उपन्यास संबोधित करता है.

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राजस्थान के रहने वाले थे स्वयं प्रकाश

डॉ अग्रवाल ने बताया कि मूलत: राजस्थान के अजमेर निवासी स्वयं प्रकाश हिंदी कथा साहित्य के क्षेत्र में मौलिक योगदान के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने ढाई सौ के आसपास कहानियां लिखीं और उनके पांच उपन्यास भी प्रकाशित हुए थे. इनके अतिरिक्त नाटक,रेखाचित्र, संस्मरण, निबंध और बाल साहित्य में भी अपने अवदान के लिए स्वयं प्रकाश को हिंदी संसार में जाना जाता है. उन्हें भारत सरकार की साहित्य अकादमी सहित देश भर की विभिन्न अकादमियों और संस्थाओं से अनेक पुरस्कार और सम्मान मिले थे. उनके लेखन पर अनेक विश्वविद्यालयों में शोध कार्य हुआ है तथा उनके साहित्य के मूल्यांकन की दृष्टि से अनेक पत्रिकाओं ने विशेषांक भी प्रकाशित किए हैं. 20 जनवरी 1947 को इंदौर में जन्मे स्वयं प्रकाश का निधन कैंसर के कारण 7 दिसंबर 2019 को हो गया था. लंबे समय से वे भोपाल में निवास कर रहे थे और यहां से निकलने वाली पत्रिकाओं ‘वसुधा’ तथा ‘चकमक’ के संपादन से भी जुड़े रहे.

जनवरी में दिया जायेगा सम्मान

डॉ अग्रवाल ने बताया कि जनवरी में आयोजित समारोह में उपन्यासकार चन्दन पांडेय को सम्मान में ग्यारह हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र और शॉल भेंट किये जाएंगे. इस सम्मान के लिए देश भर से बड़ी संख्या में प्रविष्टियान प्राप्त हुई थीं जिनमें से प्राथमिक चयन के बाद पांच उपन्यासों को निर्णायकों के पास भेजा गया. साहित्य और लोकतांत्रिक विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए गठित स्वयं प्रकाश स्मृति न्यास में कवि राजेश जोशी(भोपाल), आलोचक दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (जयपुर). कवि-आलोचक आशीष त्रिपाठी (बनारस), आलोचक पल्लव (दिल्ली), इंजी अंकिता सावंत (मुंबई) और अपूर्वा माथुर (दिल्ली) सदस्य हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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