कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पलटा, दुष्कर्म के आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 20 Aug 2024 1:57 PM

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SupremeCourt

कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पलटते हुए दुष्कर्म के आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है. जानें क्या है पूरा मामला

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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया है. दरअसल, शीर्ष कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में रिहा किए गए आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखने का फैसला किया है. कोर्ट ने मंगलवार को हाई कोर्ट के पिछले साल के विवादास्पद आदेश को खारिज कर दिया. 18 अक्तूबर 2023 को हाईकोर्ट ने विवादास्पद टिप्पणी की थी, जो चर्चा में रही थी.

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पोक्सो कानून के तहत दर्ज दुष्कर्म के एक मामले में विवादास्पद आदेश देते हुए 25 वर्षीय आरोपी को रिहा किया था. कोर्ट लड़कियों के यौन व्यवहार पर कई टिप्पणियां की थी. जस्टिस चितरंजन दास और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने दुष्कर्म के दोषी युवक को रिहा किया था. उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि प्रत्येक किशोरी और लड़की का यह कर्तव्य है कि वह अपने शरीर की अखंडता की रक्षा करे. लड़कियां अपनी यौन इच्छाओं को कंट्रोल में रखें.

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी की दोषसिद्धि को रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले को किशोर न्याय बोर्ड को भेजा जाना चाहिए था, क्योंकि किशोर न्याय अधिनियम में पीड़िता की 21 वर्ष की आयु तक देखभाल के लिए कई प्रावधान हैं. पीड़ित लड़की ने आरोपी के साथ रहने का विकल्प चुना, जिसपर पीठ ने विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति गठित करने का आदेश दिया. ऐसा इसलिए ताकि पीड़िता की इच्छा का पता लगाया जा सके कि क्या वह आरोपी के साथ रहना चाहती है या पुनर्वास के लिए तैयार है.

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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह समिति को बताए कि यदि पीड़िता और उसका बच्चा आरोपी के साथ नहीं रहना चाहते तो वे उसे कितनी आय और आवास मुहैया कराएंगे. समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कोर्ट आरोपी के खिलाफ सजा की घोषणा करेगी. सर्वोच्च न्यायालय ने इस बारे में भी कई निर्देश दिए कि फैसले कैसे लिखे जाने चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि कलकत्ता हाई कोर्ट की टिप्पणियों की आलोचना हुई थी.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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