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कोरोना का ये नया वैरिएंट है सबसे खतरनाक, 6 देशों में तहलका, वैक्सीन प्रभावी या नहीं रिसर्च जारी

Updated at : 31 Aug 2021 11:46 AM (IST)
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कोरोना का ये नया वैरिएंट है सबसे खतरनाक, 6 देशों में तहलका, वैक्सीन प्रभावी या नहीं रिसर्च जारी

13 अगस्त तक यह दक्षिण अफ्रीका के नौ प्रांतों में से छह के साथ-साथ कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मॉरीशस, पुर्तगाल, न्यूजीलैंड और स्विट्जरलैंड में पाया गया था.

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दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्होंने एक नये कोरोनावायरस वेरिएंट की पहचान की है. इस वेरिएंट को वैज्ञानिकों ने C.1.2 नाम दिया है. वैज्ञानिकों ने एक शोध पत्र में कहा कि इस नये वेरिएंट की पहली बार मई में दक्षिण अफ्रीकी प्रांतों मपुमलंगा और गौटेंग में पहचान की गयी थी, जहां जोहान्सबर्ग और राजधानी प्रिटोरिया स्थित हैं. नया वेरिएंट कितना खतरनाक है और इसपर वैक्सीन का कितना प्रभाव पड़ेगा, इस पर रिसर्च जारी है.

एनडीटीवी की एक खबर के मुताबिक 13 अगस्त तक यह दक्षिण अफ्रीका के नौ प्रांतों में से छह के साथ-साथ कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मॉरीशस, पुर्तगाल, न्यूजीलैंड और स्विट्जरलैंड में पाया गया था. वैज्ञानिकों ने कहा कि वायरस पर म्यूटेशन बढ़ी हुई संप्रेषणीयता से जुड़े हैं और एंटीबॉडी से बचने की क्षमता में वृद्धि हुई है. इस वेरिएंट के म्यूटेशन से संबंधित लक्षण को देखते हुए इसे उजागर करना महत्वपूर्ण है.

पहले भारत में पाए जाने वाले डेल्टा वैरिएंट के साथ वायरस में परिवर्तन ने वायरस की क्रमिक तरंगों को प्रेरित किया है, जो अब दुनिया भर में संक्रमण दर को बढ़ा रहा है. म्यूटेशन को पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा रुचि के प्रकारों के रूप में वर्गीकृत किया गया था. बाद में जब उन्हें अधिक गंभीर या पारगम्य के रूप में पहचाना गया तो इसे चिंता के प्रकार के रूप में रखा गया.

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यह वेरिएंट C.1 से विकसित हुआ है जो वायरस का एक वंश है और 2020 के मध्य में दक्षिण अफ्रीका में वायरस की पहली लहर में संक्रमणों के लिए जिम्मेदार था. चीन के वुहान में पाये गये मूल वायरस से इसमें 44 से 59 म्यूटेशन हैं. शोध दक्षिण अफ्रीकी समूहों द्वारा प्रकाशित किया गया था जिसमें क्वाजुलु-नेटाल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म, जिसे क्रिस्प के नाम से जाना जाता है. साथ ही इसमें नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज शामिल हैं.

मई में, वेरिएंट में देश में अनुक्रमित जीनोम का 0.2 फीसदी हिस्सा था. जून में यह बढ़कर 1.6 फीसदी और जुलाई में 2 फीसदी हो गयी. वैज्ञानिकों ने कहा कि हम वर्तमान में दोनों टीकाकृत और गैर-टीकाकरण वाले व्यक्तियों में एंटीबॉडी न्यूट्रलाइजेशन पर इस प्रकार के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं. क्रिस्प के निदेशक ट्यूलियो डी ओलिवेरा ने सोमवार को एक इम्यूनोलॉजी सम्मेलन में कहा कि परिणाम एक सप्ताह के भीतर आने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि यह केवल लगभग 100 जीनोम में पाया गया है, बहुत कम संख्या है. यह अभी भी एक बहुत छोटा प्रतिशत है, लेकिन फिर से हम वास्तव में उस पर अच्छी नजर रख रहे हैं. इसमें प्रतिरक्षा से बचने के सभी गुण मौजूद हैं.

Posted By: Amlesh Nandan.

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