फैसले में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाई कोर्ट्स को तीन महीने की सीमा तय, जानें इसका झारखंड कनेक्शन

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Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्टों में फैसलों में हो रही देरी पर सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने कहा कि लोगों को समय पर न्याय मिले, इसके लिए जल्द फैसला सुनाना जरूरी है.

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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट्स को निर्देश दिया है कि फैसला सुरक्षित रखने के तीन महीने के भीतर उसे सुनाया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फैसलों में देरी से लोगों को बड़ा नुकसान होता है. अदालत ने यह भी कहा कि जमानत मामलों में आदेश उसी दिन सुनाया जाए और अगर फैसला सुरक्षित रखा जाता है तो अगले दिन तक अपलोड कर दिया जाए. कोर्ट ने निर्देश दिए कि जमानत या सजा निलंबन का आदेश तुरंत जेल प्रशासन तक पहुंचाया जाए, ताकि आरोपी या कैदी को उसी दिन या ज्यादा से ज्यादा अगले दिन रिहा किया जा सके.

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में जल्द फैसले करने की जरूरत होती है. पीठ ने कहा कि जमानत याचिकाओं पर आदेश उसी दिन सुनाया जाना चाहिए और यदि आदेश सुरक्षित रखा जाता है तो उसे अगले दिन सुनाया और अपलोड किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का क्या है झारखंड कनेक्शन

एमिकस क्यूरी मलिका अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की शुरुआत तब हुई जब झारखंड हाई कोर्ट में 10 दोषियों की आपराधिक अपीलों पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन तीन साल तक उन पर फैसला नहीं सुनाया गया. इसके बाद संबंधित लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट के निर्देश के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने एक ही हफ्ते में 75 मामलों में फैसले सुना दिए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को बड़े स्तर पर देखा और सभी हाई कोर्ट्स से जानकारी और डेटा मंगवाया ताकि यह समझा जा सके कि फैसलों में देरी क्यों हो रही है. सभी हाई कोर्ट्स ने इसमें पूरा सहयोग किया.

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अमिताभ कुमार

लेखक के बारे में

By अमिताभ कुमार

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है. 📩 संपर्क : [email protected]

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