सलमान खुर्शीद ने अमित शाह के UPA सरकार द्वारा दबाव बनाने वाले बयान पर पूछा- उन्हें ये 8 साल बाद याद आया?

Salman Khurshid on HM Statement: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने गृहमंत्री अमित शाह के यूपीए सरकार द्वारा दबाव बनाने संबंधी बयान पर कहा कि 8 साल उन्हें अब ये याद आया? उन्हें नाम का खुलासा करना चाहिए.
Salman Khurshid on HM Statement: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने गृहमंत्री अमित शाह के यूपीए सरकार द्वारा दबाव बनाने संबंधी बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा था कि कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के दौरान सीबीआई (CBI) ने उनसे पूछताछ के दौरान गुजरात में एक कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फंसाने के लिए उन पर ‘दबाव’ डाल रही थी. इसपर सलमान खुर्शीद ने कहा कि 8 साल बाद उन्हें अब ये याद आया? उन्हें नाम का खुलासा करना चाहिए. क्या यह वही अधिकारी है जो उन पर दबाव बना रहा था और अब उनके इशारे पर दूसरों के साथ ऐसा कर रहा है?
बताते चलें कि न्यूज 18 राइजिंग इंडिया कार्यक्रम में विपक्ष के इस आरोप पर एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यह बात कही कि नरेंद्र मोदी सरकार उन्हें निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. उन्होंने कहा कि सीबीआई कांग्रेस सरकार के दौरान कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में मोदी जी, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, को फंसाने के लिए मुझ पर दबाव बना रही थी. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद बीजेपी ने कभी हंगामा नहीं किया.
सूरत की एक अदालत द्वारा मानहानि के मामले में राहुल गांधी को दोषी ठहराए जाने पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस नेता अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जिन्हें अदालत ने दोषी ठहराया है और जिन्होंने लोकसभा की सदस्यता खो दी है. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में जाने के बजाय राहुल गांधी हो-हल्ला करने की कोशिश कर रहे हैं और अपनी किस्मत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोष दे रहे हैं. अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दोष मढ़ने की कोशिश करने के बजाय अपने आपको दोषी ठहराए जाने के खिलाफ लड़ने के लिए ऊपरी अदालत में जाना चाहिए.
वहीं, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद से जब पूछा गया कि क्या विदेश मंत्रालय को हस्तक्षेप करना चाहिए और राहुल गांधी के मुद्दे पर ध्यान देने के लिए अपने जर्मन समकक्षों से बात करनी चाहिए तो इसपर उन्होंने कहा कि हमें उन्हें क्यों बताना चाहिए कि क्या करना चाहिए? उन्होंने आगे कहा कि यह उनका काम है. अगर उन्होंने हमसे मदद मांगी होती तो हम इसके बारे में सोचते, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि जो कुछ कहा गया है हम उससे सहमत हैं. हम किसी बाहरी चीज का विरोध कैसे कर सकते हैं, जिससे हम यहां सहमत है.
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लेखक के बारे में
By Samir Kumar
More than 15 years of professional experience in the field of media industry after M.A. in Journalism From MCRPV Noida in 2005
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