बीजेपी के आरोप पर सचिन पायलट का पलटवार, कहा- मिजोरम पर बम गिराने के दावे तथ्यहीन

Published by : Pritish Sahay Updated At : 15 Aug 2023 7:46 PM

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सचिन पायलट ने बीजेपी नेता अमित मालवीय के दावों का जवाब देते हुए कहा कि आपके पास गलत तारीखें, गलत तथ्य हैं… हां, भारतीय वायु सेना के पायलट के रूप में, मेरे दिवंगत पिता ने बम गिराए थे. लेकिन वह 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान पर था, न कि जैसा कि आप दावा करते हैं.

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कांग्रेस नेता और  राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मंगलवार को अपने पिता राजेश पायलट पर बीजेपी नेता की ओर से की गई टिप्पणी पर कहा कि उनके पिता पर लगाये गये आरोप तथ्यहीन है, उसमें कोई सच्चाई नहीं है.  सचिन पायलट ने कहा कि भारतीय वायु सेना के पायलट के रूप में, मेरे दिवंगत पिता ने बम गिराए थे. लेकिन, वह 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान पर था, न कि जैसा कि आप दावा करते हैं, 5 मार्च 1966 को मिजोरम पर. उन्हें 29 अक्टूबर 1966 को ही भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. बता दें, भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया था कि राजेश पायलट ने पायलट के रूप में 1966 में मिजोरम की राजधानी आइजोल पर बम गिराए थे.

गौरतलब है कि मालवीय ने दावा किया था कि राजेश पायलट ने बतौर पायलट 1966 में मिजोरम की राजधानी आइजोल पर बम गिराए थे. उन्होंने कहा था कि सुरेश पायलट भारतीय वायु सेना के विमान उड़ा रहे थे, जिन्होंने 5 मार्च को मिजोरम की राजधानी आइजोल पर बम गिराए थे. बाद में ये दोनों कांग्रेस सांसद और बाद में मंत्री बने. इंदिरा गांधी ने राजनीतिक अवसरों के माध्यम से उत्तर पूर्व में साथी नागरिकों पर हवाई हमले करने वालों को सम्मानित किया. लेकिन सचिन पायलट ने मालवीय के दावों का जवाब देते हुए कहा कि आपके पास गलत तारीखें, गलत तथ्य हैं… हां, भारतीय वायु सेना के पायलट के रूप में, मेरे दिवंगत पिता ने बम गिराए थे. लेकिन वह 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान पर था, न कि जैसा कि आप दावा करते हैं.

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कही थी यह बात

इस मामले में बीजेपी नेता और भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने राजेश पायलट और सुरेश कलमाड़ी भारतीय वायुसेना के उन विमानों को उड़ा रहे थे जिन्होंने 5 मार्च 1966 को मिजोरम की राजधानी आइजवाल पर बम गिराये थे. बाद में दोनों कांग्रेस के टिकट पर सांसद और सरकार में मंत्री भी बने. स्पष्ट है कि नार्थ ईस्ट में अपने ही लोगों पर हवाई हमला करने वालों को इंदिरा गांधी ने बतौर इनाम राजनीति में जगह दी, सम्मान दिया.

पीएम मोदी ने भी कही थी यह बात
इधर, संसद के मानसून सत्र के दौरान अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए पीएम ने कहा भी कहा था कि 5 मार्च 1966 को कांग्रेस ने मिजोरम में असहाय नागरिकों पर अपनी वायुसेना के माध्यम से हमला करवाया था. पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि उस समय पीएम इंदिरा गांधी थीं. कांग्रेस वाले जवाब दें कि क्या वो किसी दूसरे देश की वायुसेना थी… पीएम मोदी ने विपक्ष से सवाल करते हुए कहा था कि उनकी सुरक्षा भारत सरकार की जिम्मेदारी थी या नहीं.. पीएम मोदी ने कहा कि आज भी इसका मिजोरम के लोग शोक मनाते हैं, लेकिन कभी किसी कांग्रेसी ने इसपर मरहम लगाने की कोशिश नहीं की. कांग्रेस ने इस सच को देश से छुपाया है.

हालांकि इस दौरान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री का बचाव किया था. साथ ही उन्होंने कहा था कि मार्च 1966 में मिजोरम में पाकिस्तान और चीन से समर्थन पाने वाली अलगाववादी ताकतों से निपटने के लिए इंदिरा गांधी के असाधारण सख्त फैसले के साथ ही उन्होंने मिजोरम को बचाया. रमेश ने कहा कि भारतीय राज्य से लड़ने वालों के साथ बातचीत शुरू की और अंततः 30 जून 1986 को एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. 

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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