RG Kar Doctor Murder Case : बंगाल सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने किया कड़ा सवाल, CBI को मिला और वक्त

Edited by Amitabh Kumar
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Supreme-Court/ File Photo

RG Kar Doctor Murder Case : कोलकाता में डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बंगाल सरकार से कई कड़े सवाल किए. जानें ममता सरकार की ओर से कोर्ट को क्या बताया गया.

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RG Kar Doctor Murder Case : कोलकाता में डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने मामले की सुनवाई की और बंगाल सरकार से कई सवाल किए. सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जांच एजेंसी ने फोरेंसिक नमूने एम्स भेजने का फैसला किया है. कोर्ट ने सीबीआई को जांच पर नई स्टेट्स रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है. इसके लिए जांच एजेंसी को एक हफ्ते का समय दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई अगले मंगलवार (17 सितंबर) को होगी.

डॉक्टरों की हड़ताल के बीच 23 लोगों की मौत : बंगाल सरकार

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट जमा की, जिसमें बताया गया कि डॉक्टरों की हड़ताल के बीच 23 लोगों की मौत हो गई है. पश्चिम बंगाल सरकार की ओर कपिल सिब्बल कोर्ट में उपस्थित हुए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि हमने जवाब की कॉपी सिर्फ कोर्ट में जमा की है. सीबीआई को अभी तक इसकी कॉपी नहीं दी गई है. डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से जब डॉक्टर अस्पताल में काम नहीं कर रहे थे, उस वक्त 23 लोगों की इलाज की कमी की वजह से मौत हो गयी.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया सवाल

1. सीजेआई ने पूछा सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि आरोपी किस समय वहां दाखिल हुआ और वहां मौजूद था. सुबह 4:30 बजे के बाद की फुटेज होगी ये…क्या सीसीटीवी फुटेज पूरी तरह से सीबीआई को सौंपी गई है? इसका जवाब कोर्ट को हां में दिया गया.

2. सीजेआई ने कहा सीबीआई द्वारा स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है. ऐसा प्रतीत होता है कि जांच आगे बढ़ रहा है. हम सीबीआई को नई स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हैं. हम इसे मंगलवार को लेंगे, देखते हैं अब क्या होता है. सीबीआई को हम उसकी जांच के लिए मार्गदर्शन नहीं देना चाहते हैं.

3. सीआईएसएफ की तीन महिला कंपनियां हैं, जिन्हें पर्याप्त आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है. उनको ट्रैवल में 1.5 घंटे लगते हैं. सीजेआई ने पूछा वे कहां रह रहे हैं? सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि सीआईएसएफ के अधिकांश जवान अस्पताल में हैं, अन्य बाहर हैं. कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीआइएसएफ के लिए जरूरी सभी सुरक्षा संसाधन उसे आज ही मुहैया कराए जाएं.

4. सीजेआई ने पूछा कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए पश्चिम बंगाल ने क्या कदम उठाए हैं? सिब्बल ने कहा- हमने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है.

पश्चिम बंगाल सरकार सहयोग नहीं कर रही: केंद्र

केंद्र ने हाल में सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दायर कर आरोप लगाया कि अस्पताल की सुरक्षा के लिए तैनात सीआईएसएफ को साजो-सामान संबंधी सहायता देने में पश्चिम बंगाल सरकार सहयोग नहीं कर रही है. अपनी अर्जी में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने टीएमसी सरकार के कथित असहयोग को ‘‘व्यवस्थागत खामी का लक्षण’’ बताया है. राज्य प्राधिकारों को सीआईएसएफ को पूर्ण सहयोग देने का निर्देश देने का अनुरोध किया.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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