No-Confidence Motion : सदन में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा, कहा-लंका को रावण के अहंकार ने जलाया था

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दूसरे दिन आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चर्चा में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर जमकर हमला बोला. राहुल गांधी ने कहा कि मैं मणिपुर गया, लेकिन पीएम मोदी नहीं गये क्योंकि उनके लिए मणिपुर हिंदुस्तान नहीं है.
Rahul Gandhi In Lok Sabha : अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दूसरे दिन आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चर्चा में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर जमकर हमला बोला. राहुल गांधी ने कहा कि मैं मणिपुर गया, लेकिन पीएम मोदी नहीं गये क्योंकि उनके लिए मणिपुर हिंदुस्तान नहीं है. आपकी सरकार ने मणिपुर को बांट दिया है. आज मणिपुर बचा नहीं है. राहुल गांधी ने कहा कि मणिपुर के लोगों की आवाज भारत माता की आवाज है, लेकिन आपलोगों ने भारत माता की आवाज नहीं सुनी.
#WATCH | Congress MP Rahul Gandhi says, "They killed India in Manipur. Not just Manipur but they killed India. Their politics has not killed Manipur, but it has killed India in Manipur. They have murdered India in Manipur." pic.twitter.com/u0ROyHpNRL
— ANI (@ANI) August 9, 2023
अविश्वास पर चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर कई गंभीर आरोप लगाए है. उन्होंने कहा, ‘आपलोगों ने भारत माता की हत्या की है. आप उनके रखवाले नहीं उनके हत्यारे हैं.’ आप वहां जबतक हिंसा नहीं रोकेंगे वहां भारत माता की हत्या होती रहेगी. लेकिन मोदी जी को भारत के आम लोगों की आवाज सुनाई नहीं देती है.’ साथ ही उन्होंने कहा कि मोदी जी को सिर्फ दो लोगों की आवाज सुनाई देती है अमित शाह और अदाणी की. लंका को हनुमान ने नहीं उसके अहंकार ने जलाया था.
मणिपुर मामले पर उन्होंने कहा कि मैंने महिलाओं से बात की, बच्चों से बात की. एक महिला ने बताया कि मेरे छोटे से बच्चे को मेरे सामने गोली मार दी गयी. मैं पूरी रात उसके लाश के साथ रही. फिर मुझे डर लगा और मैंने अपना घर छोड़ दिया. दूसरी महिला से जब मैंने पूछा तुम्हारे साथ क्या हुआ- वह मेरे साथ कांपती हुई बेहोश हो गयी. साथ ही राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि मणिपुर में आपकी सरकार ने हिंदुस्तान की हत्या की है.
भारत जोड़ो यात्रा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मैं हिंदुस्तान को अहंकार से देखने निकला था, वह कुछ ही दिन में निकल गया. मेरे घुटने में पुराना घाव था, जो मुझे चलने नहीं दे रहा था. लेकिन कुछ ही दिन में मेरा अहंकार चला गया. कुछ दिन में ऐसी घटनाएं होने लगी, जिन्होंने मुझे चलने की शक्ति दी. कभी आठ साल की बच्ची ने तो कभी किसान ने मुझे शक्ति दी. साथ ही उन्होंने अपने मणिपुर दौरे पर कहा कि मैं मणिपुर गया, पीएम मोदी नहीं गये.
आगे उन्होंने कहा कि उनके लिए मणिपुर हिंदुस्तान नहीं है. राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष से कहा कि आपकी सरकार ने मणिपुर को बांट दिया है. आज मणिपुर बचा नहीं है. मैंने महिलाओं से बात की, बच्चों से बात की. अपने संबोधन की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी के मित्रों को आज डरने की जरूरत नहीं है. मैं उनपर ज्यादा हमले नहीं करूंगा. पिछली साल मैंने समुद्र की तट से कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियों पर यात्रा की थी.
उन्होंने कहा कि यात्रा अभी जारी रहेगी, यात्रा के दौरान कई लोगों ने मुझसे यह पूछा कि तुम यात्रा क्यों कर रहे हो, तुम्हारा लक्ष्य क्या है? शुरुआत में मेरे मुंह से जवाब नहीं निकलता था, शायद मुझे ही नहीं पता था कि मैंने यह यात्रा क्यों शुरू की थी. मैं यह समझता था कि हिंदुस्तान को जानना चाहता हूं. चीजों को समझना चाहता हूं, लेकिन गहराई से मैं नहीं समझ पा रहा था. लेकिन धीरे-धीरे मैं समझ गया कि जिस चीज के लिए मैं जान देने को तैयार हूं, मोदी जी की जेल में जाना चाहता हूं वो चीज है क्या?
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत स्पीकर को धन्यवाद कहकर की. उन्होंने कहा कि आपने मेरी सदस्यता बहाल की इसके लिए आपको धन्यवाद. राहुल गांधी ने कहा कि पिछली बार मैंने आपको कष्ट पहुंचाया था. मैंने पिछली बार अदाणी जी को केंद्रित करके भाषण दिया था जिसकी वजह से बीजेपी के नेताओं को कष्ट पहुंचाया था. इस बार मैं अदाणी पर फोकस करके भाषण नहीं दूंगा.
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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