राहुल गांधी ने पीएम मोदी और अमित शाह को बताया डरपोक, कहा-गुंडे भेजकर छात्रों से मंगवा रहे हैं माफी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर छात्रों के आंदोलन को दबाने और उनसे डरा कर माफी मंगवाने का आरोप लगाया. इस अवसर पर कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने भी अपनी आपबीती सुनाई.
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मुंह छिपा रहे हैं क्योंकि वो छात्रों के गुनहगार हैं. उनके अंदर इतनी हिम्मत नहीं है कि वे मीडिया और देश के सामने आएं. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 10 जनपथ पर आयोजित प्रेस काॅन्फ्रेंस में यह बातें कही. उन्होंने कहा कि छात्रों ने कुछ गलत नहीं किया है, लेकिन उनके घर पर गुंडे भेजे जा रहे हैं. उनसे डराकर माफी मंगवाई जा रही है. हमें शिक्षा व्यवस्था में बदलाव चाहिए.
राहुल गांधी ने कहा कि वे डरे हुए हैं, इसी वजह से ना तो वे मीडिया के सामने आ रहे हैं और ना ही संसद आ रहे हैं. उन्हें यह डर सता रहा है कि अगर वे संसद आए तो विपक्ष उनसे सवाल करेगा और उनसे माफी की अपील करेगा.
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर अमित शाह से जवाब मांग रहा है. विपक्षी सांसदों ने सदन की कार्यवाही से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह की गैरमौजूदगी पर भी बार-बार सवाल उठाए हैं.
प्रदर्शनकारियों ने अपनी पीड़ा बताई
राहुल गांधी की प्रेस काॅन्फ्रेंस में कुछ ऐसे प्रदर्शनकारी भी शामिल हुए जिन्होंने 20 जुलाई को पुलिस की लाठियां खाई हैं. एक लड़के ने अपनी आपबीती बताई. उसने बताया कि किस तरह पुलिसकर्मी छात्रों पर लाठियां चला रहे थे. पुलिस वाले निर्दयता से प्रहार कर रहे थे और छात्रों के सिर और पैर को निशाना बना रहे थे.
एक महिला प्रदर्शनकारी मुस्कान शर्मा ने सवाल पूछा कि जब महिलाओं पर कार्रवाई के लिए महिला पुलिस होती हैं, तो फिर किस नियम के तहत पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके बदन को हाथ लगाया. उन्होंने कहा कि यह आदेश देने वाला व्यक्ति अगर माफी मांगे, तो मुझे खुशी होगी. साथ ही हमें जिस तरह से सोशल मीडिया में ट्रोल किया जा रहे है, उससे शांति मिलेगी. मुस्कान ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर मुझे मुसलमान बताकर परेशान किया जा रहा है,लेकिन मैं हिंदू हूं.
रिया अहीर ने भी पूछे सवाल
मुंबई में प्रदर्शन कर चर्चा में आई रिया अहीर ने भी प्रेस काॅन्फ्रेंस में सवाल पूछा. उसने कहा कि मेरे बारे में यह कहा जाता है कि मैंने मुंबई पुलिस को रोका,इसलिए वायरल हुई. जबकि सच्चाई यह है कि मैंने 30 बच्चों को गलत तरीके से हिरासत में लेने से रोका था. मीडिया इसे सुधार कर ले. उसने सवाल किया कि क्या देश में न्याय पाने का हक सिर्फ उन्हीं को है, जो संवैधानिक पद पर बैठे हैं. क्या आम आदमी को न्याय पाने का हक नहीं है. छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है, इसलिए हमने आवाज उठाई.
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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