प्रेस एसोसिएशन का पीएम मोदी से आग्रह, पत्रकारों को भी मिले इंश्योरेंस का लाभ

Press Association urges PM Modi : भारत सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकारों की संस्था प्रेस एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि कोरोना वायरस के खतरे के तहत अस्पतालों में जुटे डॉक्टर्स, नर्स और अन्य मेडिकल सेवा के लिए जिस तरह पचास लाख रुपये के इंश्योरेंस की घोषणा की गयी है, उसी तरह पत्रकारों के लिए भी इंश्योरेंस की घोषणा की जाये.
भारत सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकारों की संस्था प्रेस एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि कोरोना वायरस के खतरे के तहत अस्पतालों में जुटे डॉक्टर्स, नर्स और अन्य मेडिकल सेवा के लिए जिस तरह पचास लाख रुपये के इंश्योरेंस की घोषणा की गयी है, उसी तरह पत्रकारों के लिए भी इंश्योरेंस की घोषणा की जाये.
उल्लेखनीय है कि बुधवार को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवा में जुटे मेडिकल सेवा के लिए पचास लाख रुपये इंश्योरेंस की घोषणा की है. प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में प्रेस एसोसिएशन ने अनुरोध किया है कि मेडिकल सेवा के साथ उस लिस्ट में पत्रकारों को भी जोड़ा जाये.
प्रधानमंत्री को याद दिलाया गया कि मीडिया के कामकाज को जरूरी सेवाओं में शामिल कर उनके कामकाज का उन्होंने खुद अभिवादन किया है. प्रेस एसोसिएशन ने कहा कि पत्रकारों के लिए भी इंश्योरेंस सेवा लागू होने से पत्रकारों और उनके परिजनों का मनोबल बढ़ेगा. साथ ही ग्राउंड जीरो से पल- पल की खबरें देश को पहुंचाकर देशसेवा करने वाले पत्रकारों को ऐसा लगेगा कि सरकार को उनकी भी उतनी ही चिंता है, जितनी अन्य इमरजेंसी सर्विस से जुड़े लोगों की. गौरतलब है कि देशभर में कोरोना वायरस के खतरे के बीच भी पत्रकार डटे हुए हैं और आम लोगों को इससे संबंधित सूचनाएं दे रहे हैं.
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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