प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज यानी शनिवार को असम के दो दिवसीय दौरे पर जाएंगे. इस दौरान वह दो अमृत भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के साथ-साथ ‘काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर’ की आधारशिला रखेंगे. एक महीने से भी कम समय में मोदी का पूर्वोत्तर राज्य का यह दूसरा दौरा है. असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. एक अधिकारी ने शुक्रवार को पीटीआई को बताया कि प्रधानमंत्री शनिवार शाम को गुवाहाटी पहुंचेंगे. इसके तुरंत बाद वह शहर के अर्जुन भोगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स स्टेडियम में 10,000 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत बोडो लोक नृत्य ‘बागुरुम्बा’ को देखेंगे.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने ‘एक्स’ कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने हमारे साथ बिहू एवं झुमोइर देखा है और अब से कुछ ही घंटों में नरेन्द्र मोदी अब तक की सबसे बड़ी ‘बागुरुम्बा’ प्रस्तुति के साक्षी बनेंगे, जिसमें 10,000 से अधिक कलाकार अपने मनमोहक प्रदर्शन से पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर देंगे.” अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री गुवाहाटी के कोइनाधारा में स्थित राजकीय अतिथि गृह में ही रात्रि विश्राम करेंगे. पीएम 6,957 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर की आधारशिला रखने के लिए अगले दिन कलियाबोर रवाना होंगे.
अधिकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री द्वारा डिजिटल माध्यम से डिब्रूगढ़-गोमती नगर (लखनऊ) और कामाख्या-रोहतक (हरियाणा) नामक दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने और कलियाबोर में एक जनसभा को संबोधित किए जाने का कार्यक्रम है. पीएम मोदी 20 दिसंबर को दो दिवसीय दौरे पर असम आए थे, जहां उन्होंने गुवाहाटी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने असम के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई की प्रतिमा का अनावरण किया था. उन्हीं के नाम पर हवाई अड्डे का नाम रखा गया है.
प्रधानमंत्री ने डिब्रूगढ़ में 10,601 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ब्राउनफील्ड अमोनिया-यूरिया संयंत्र की आधारशिला भी रखी थी. अपने पिछले दौरे पर मोदी ने गुवाहाटी और नामरूप में जनसभाओं को संबोधित किया, जहां उन्होंने 2026 के असम विधानसभा चुनावों के लिए माहौल तैयार किया था.
काजीरंगा क्यों है खास?
काजीरंगा में 34.5 किलोमीटर लंबा उन्नत (एलीवेटेड) कॉरिडोर मौजूदा मुख्य मार्ग का हिस्सा होगा, जो राष्ट्रीय उद्यान और पूर्वी असम को राज्य की राजधानी गुवाहाटी से जोड़ता है. इसका उद्देश्य जानवरों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना है, क्योंकि वर्तमान में बाढ़ के दौरान यह हाईवे उनके प्राकृतिक आवागमन में बाधा डालता है. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, जो एक सिंगल सींग वाले गैंडे की सबसे बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है. यह 37 स्तनधारी प्रजातियों और लगभग 500 पक्षी प्रजातियों का घर है. यह उद्यान ब्रह्मपुत्र के मैदानों में नगाॉन जिले (केंद्रीय असम) और गोलाघाट जिले (पूर्वी असम) में स्थित है. राष्ट्रीय राजमार्ग 715 (पहले NH-37) तेजपुर से पूर्वी असम के कस्बों को जोड़ता है. राष्ट्रीय उद्यान इसकी दक्षिणी सीमा बनाता है और इसके पार करबी अंगलांग की पहाड़ियाँ हैं.
बढ़ता यातायात जानवरों के लिए खतरा
राष्ट्रीय राजमार्ग और उसके माध्यम से गुजरने वाला यातायात राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवन के लिए एक बड़ा खतरा है. विशेषज्ञों और वन अधिकारियों के अनुसार, यह कॉरिडोर राष्ट्रीय उद्यान में भारी यातायात के कारण जानवरों के मरने की बढ़ती समस्या का समाधान हो सकता है. इस व्यस्त हाईवे को पार करने की कोशिश करते समय जानवरों की मौतें आम हो गई हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गुवाहाटी विश्वविद्यालय की एक टीम ने 2022 में इस मार्ग पर सड़क दुर्घटनाओं के अध्ययन में अक्टूबर 2016 से सितंबर 2017 के बीच 6,036 जानवरों की मौत दर्ज की, जिसमें एक भारतीय तेंदुआ भी शामिल था. इनमें से 63.6% मौतें अप्रैल से सितंबर के बाढ़ के समय हुईं. रिपोर्ट के अनुसार, इस फाइनेंशियल ईयर (1 अप्रैल से 31 मार्च) में इस मार्ग पर औसत दैनिक यातायात 13,800 वाहन है. अध्ययन में कहा गया कि सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण वाहन की हाई स्पीड है. इसलिए गति नियंत्रण और उचित पारगमन डिजाइन की जरूरत है ताकि सभी जानवर सुरक्षित रूप से आ-जा सकें.
कहां से कहां तक और कैसे बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को असम के काजीरंगा में 34.5 किलोमीटर लंबा उन्नत (एलीवेटेड) कॉरिडोर शुरू करेंगे. यह 6,950 करोड़ रुपये का नया कॉरिडोर मौजूदा मुख्य मार्ग का हिस्सा होगा, जो राष्ट्रीय उद्यान और पूर्वी असम को राज्य की राजधानी गुवाहाटी से जोड़ता है. इसका उद्देश्य जानवरों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना है, क्योंकि वर्तमान में बाढ़ के दौरान यह हाईवे उनके प्राकृतिक आवागमन में बाधा डालता है.
इस वर्ष अक्टूबर में, केंद्र सरकार की कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने इस हाईवे के 86.675-किलोमीटर लंबे दो-लेन हिस्से को चार लेन में विस्तारित करने की मंजूरी दी. इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय उद्यान की सीमा से होकर गुजरता है. इसमें 34.5 किलोमीटर लंबा एलीवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना है, जिसके नीचे जानवरों के काजीरंगा से करबी अंगलांग पहाड़ियों तक जाने का रास्ता छोड़ा जाएगा.
सरकार के अनुसार, इस परियोजना में 30.22 किलोमीटर मौजूदा सड़कों का एलिवेटेड और जाखलाबांधा और बोकाखाट कस्बों के आसपास 21 किलोमीटर नया ग्रीनफील्ड बाईपास शामिल है. इसका उद्देश्य मौजूदा मार्ग का बोझ कम करना, सुरक्षा बढ़ाना और गुवाहाटी, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और नुमालिगढ़ के औद्योगिक शहर के बीच सीधी कनेक्टिविटी सुधारना है.
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