PFI बैन के बाद RSS पर भी नकेल कसने की मांग, आजादी से अब तक 14 संगठनों पर लगे प्रतिबंध

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 28 Sep 2022 4:59 PM

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Meerut: Members of PFI arrested by ATS and police, in Meerut, Saturday, Sept. 24, 2022. (PTI Photo) (PTI09_24_2022_000154B)

देश की आजादी से लेकर अब तक तीन बार RSS को भी बैन किया जा चूका है. नाथूराम गोडसे द्वारा साल 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद RSS को प्रतिबंधित कर दिया गया था. दूसरी बार 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाए जाने के बाद और तीसरी बार 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंश के बाद भी प्रतिबंध लगा था.

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केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा PFI पर पर पांच साल के लिए बैन लगाए जाने के बाद केरल में विपक्षी कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भी बैन करने की मांग कर दी है. उन्होंने कहा है कि PFI पर बैन का सरकार के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं , लेकिन हम RSS को भी बैन करने की मांग करते हैं. केरल से कांग्रेस सांसद के सुरेश ने कहा कि PFI को बैन करना कोई उपाय नहीं है. PFI और RSS एक समान है और RSS भी देश में हिन्दू साम्प्रदायिकता फैला रही है. इसलिए RSS को भी बैन कर देना चाहिए.

आजादी से अब तक तीन बार RSS को किया बैन

देश की आजादी से लेकर अब तक तीन बार RSS को भी बैन किया जा चूका है. नाथूराम गोडसे द्वारा साल 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद RSS को प्रतिबंधित कर दिया गया था. दूसरी बार 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाए जाने के बाद और तीसरी बार 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंश के बाद भी RSS पर प्रतिबंध लगा था. इन तीनों ही बार RSS के खिलाफ कोई साक्ष्य ना होने के कारण सरकार ने बैन हटा दिया.

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PFI सहित 14 संगठन प्रतिबंधित

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आकड़ों की प्रतिबंधित सूची में अब PFI का नाम भी शामिल हो गया है , इससे पहले गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के धारा 3 के तहत 13 संगठन प्रतिबंधित थे. इन 14 नामों की सूचि में सिमी (SIMI) , उल्फा (ULFA ), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB), ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स(ATTF ), नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT), लिबरेशन टाइगर ऑफ तमिल एलाम (LTTE), नेशनल सोशलिस्ट कॉउंसिल ऑफ नागालैण्ड (NSCN – KHAPLANG), इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF), जमात – ए – इस्लामी (JeL), जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF), मेइटी एक्सट्रेमिस्ट आर्गेनाइजेशन मणिपुर , हैनीट्रेप नेशनल लिबरेशन कॉउंसिल (HNLC), सिख फॉर जस्टिस (SFJ) और पोपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के नाम शामिल है.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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