Waqf Amendment Act: 'वैधता के खिलाफ दाखिल याचिकाएं हो खारिज', केंद्र ने SC में दायर किया हलफनामा

Published by : Pritish Sahay Updated At : 25 Apr 2025 9:36 PM

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Supreme Court on Pahalgam attack

Waqf Amendment Act: केंद्र ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया. केंद्र ने अपनी दलील में कहा कि बीते 100 सालों से उपयोगकर्ता की ओर से वक्फ को केवल पंजीकरण के बाद ही मान्यता दी जाती है, मौखिक रूप से नहीं. ऐसे में इसमें संशोधन जरूरी था. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की वैधता के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया.

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Waqf Amendment Act: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन एक्ट पर जवाबी हलफनामा दाखिल किया. अपने हलफनामे में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की वैधता के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया है. केंद्र ने दलील दी है कि यह याचिकाएं निराधार तथ्यों के आधार पर दायर की गई हैं कि संशोधन से धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, बल्कि संसद के बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की परिकल्पना लागू होती है. केंद्र ने कहा कि संसदीय समिति ने व्यापक, गहन, विश्लेषणात्मक अध्ययन के बाद इसमें संशोधन किये है.

केंद्र ने दिया सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब

न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र ने अपने जवाब में कहा कि पिछले 100 सालों से उपयोगकर्ता की ओर से वक्फ को केवल पंजीकरण के बाद ही मान्यता दी जाती है, मौखिक रूप से नहीं. ऐसे में संशोधन जरूरी था. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुगल काल से पहले, आजादी से पहले और आजादी के बाद वक्फ की कुल संपत्ति 18,29,163.896 एकड़ थी. जबकि, साल 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20,92,072.536 एकड़ का इजाफा हुआ है.

वक्फ वैधानिक निकाय- केंद्र सरकार

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 वैध, विधायी शक्ति का उचित प्रयोग है. संसद ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम करते हुए यह सुनिश्चित किया कि वक्फ जैसी धार्मिक व्यवस्था का प्रबंधन किया जाए और उसमें जताया गया भरोसा कायम रहे. केंद्र ने कहा कि जब वैधता की परिकल्पना की जाती है तो प्रतिकूल परिणामों के बारे में जाने बिना ही पूरी तरह रोक लगाना अनुचित है. केंद्र ने यह भी कहा कि वक्फ मुसलमानों की कोई धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि वैधानिक निकाय है.  

केंद्र सरकार ने दिया तर्क

केंद्र ने कहा कि वक्फ बिल को पारित करने से पहले संयुक्त संसदीय समिति की 36 बैठकें हुईं थी. 97 लाख से ज्यादा हितधारकों ने सुझाव और ज्ञापन दिए हैं. समिति ने देश के दस बड़े शहरों का दौरा किया और जनता के बीच जाकर उनके विचार जाने. केंद्र सरकार का यह भी कहना है कि वक्फ अधिनियम को लेकर जितनी भी याचिकाएं दायर की गई हैं, उनमें किसी भी व्यक्तिगत मामले में अन्याय की शिकायत नहीं की गई है. ऐसे में अंतरिम आदेश के जरिए कोई भी सरंक्षण नहीं दिया जाना चाहिए.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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