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पाक की ना 'पाक' साजिश! गैर सिख संस्था को सौंपा करतारपुर साहिब गुरुद्वारा का जिम्मा, भारत ने कही ये बात

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
करतारपुर दरबार साहिब गुरुद्वारा
करतारपुर दरबार साहिब गुरुद्वारा
Photo: Twitter

नयी दिल्ली: पाकिस्तान ने एक और नापाक चाल चलते हुए करतारपुर स्थित दरबार साहिब का मैनेजमेंट पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से लेकर दूसरी कमेटी को सौंप दिया है. जानकारी मिली है कि पाकिस्तान ने जिस कमेटी को करतारपुर दरबार साहिब के मैनेजमेंट का काम सौंपा है उसमें एक भी सिख मेंबर नहीं है.

भारत ने पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना की. भारत ने कहा कि पाकिस्तान का ये कदम बताता है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकार को लेकर उसकी क्या नीयत है.

भारत ने पाकिस्तान की तीखी आलोचना की

गुरुवार को भारत ने इस बारे में एक बयान जारी किया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमें पता चला है कि पाकिस्तान ने पवित्र गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के प्रबंधन और रखरखाव का जिम्मा पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से लेकर किसी और संगठन को सौंप दिया है. पाकिस्तान ने करतारपुर साहिब का प्रबंधन एक गैर सिख संस्था इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड को सौंप दिया है, जो सरासर नाइंसाफी है.

'पाकिस्तान का फैसला निहायत एकतरफा है'

भारत ने कहा कि पाकिस्तान का ये कदम एकतरफा है और हम इसकी निंदा करते हैं. भारत ने कहा कि ये ना केवल करतारपुर कॉरिडोर के संधियों के खिलाफ है बल्कि सिख समुदाय की धार्मिक भावना के भी खिलाफ है. भारत ने कहा कि उसने पाकिस्तान के सिख समुदाय के प्रतिनिधियों से बात की है और सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि पाकिस्तान में सिख समुदाय के अधिकारों की रक्षा हो. भारत ने पाकिस्तान से मांग की है कि वो अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और इसे बदले.

जानें क्या है पाकिस्तान का इवैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड

जानकारी के मुताबिक इवैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड की स्थापना साल 1960 में की गई थी. इसका मुख्यालय लाहौर में है. ये बोर्ड इसलिए बनाया गया था ताकि बंटवारे के वक्त पाकिस्तान में हिंदू और सिख परिवारों द्वारा छोड़ दी गई जमीन की देखभाल की जा सके. ये स्ववित्तपोषित निकाय है. इसी का एक हिस्सा है पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जिसे गुरुद्वारा दरबार साहिब की देखरेख का जिम्मा सौंपा गया था.

पाकिस्तान कॉरीडोर से आर्थिक लाभ कमाना चाहता है

कहा जा रहा है कि पाकिस्तान ने आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से और करतारपुर कॉरीडोर का कमर्शियल लाभ उठाने के लिए ऐसा फैसला किया. पाकिस्तान ने तय किया है कि जो भी भारतीय सिख श्रद्धालु करतारपुर कॉरीडोर के जरिए दरबार साहिब गुरुद्वारा का दर्शन करने जाएगा उसे 20 डॉलर का भुगतान करना होगा.

इस बीच भारत में शिरोमणि अकाली दल ने भी पाकिस्तान की इस हरकत की आलोचना की है. पार्टी प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पाकिस्तान का ये फैसला निंदनीय है.

Posted By- Suraj Thakur

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