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देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले 300 पहुंचे, कर्नाटक में आज आये 12 केस, जानिए कितना खतरनाक है ये वैरिएंट...

Updated at : 23 Dec 2021 5:19 PM (IST)
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देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले 300 पहुंचे, कर्नाटक में आज आये 12 केस, जानिए कितना खतरनाक है ये वैरिएंट...

राजधानी दिल्ली में भी कोरोना संक्रमितों की संख्या काफी बढ़ गयी है और ओमिक्रॉन के मामले 57 हो गये हैं जबकि कोरोना संक्रमण 100 के पार चला गया है.

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देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट का खतरा बढ़ता जा रहा है, आज दोपहर तक देश में 300 मामले सामने आ चुके हैं. कर्नाटक में आज 12 नये मामले सामने आये हैं, जिसके बाद कर्नाटक में ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या बढ़कर 31 हो गयी है.

वहीं आज केरल में पांच नये ओमिक्रॉन संक्रमित सामने आये हैं. राजधानी दिल्ली में भी कोरोना संक्रमितों की संख्या काफी बढ़ गयी है और ओमिक्रॉन के मामले 57 हो गये हैं जबकि कोरोना संक्रमण 100 के पार चला गया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर बैठक की और सतर्कता बरतते हुए तैयारियों की समीक्षा की.

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है और ना ही उन्हें भागकर अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है. सरकार होम आइसोलेशन की व्यवस्था करेगी और मरीजों के लिए दवा तक घर में पहुंचायेगी.

ओमिक्रॉन से कितना है खतरा

कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर दो रिसर्च हुआ है जिसमें यह बात सामने आयी है कि वायरस का ओमिक्रॉन वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट की तुलना में कम खतरनाक है और इसमें पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल में भरती कराने की जरूरत कम पड़ती है.

इम्पीरियल कॉलेज लंदन द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि पीसीआर की जांच में जिन लोगों में ओमिक्रॉन की पुष्टि हुई है उन्हें डेल्टा स्वरूप की तुलना में अस्पताल में एक रात या इससे अधिक समय गुजारने की संभावना 40 से 45 फीसदी तक कम रही. अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों को पहले संक्रमण हुआ था और अब वे ओमीक्रोन से पीड़ित हैं उन लोगों की तुलना में उन्हें 50 से 60 फीसदी तक अस्पताल में भर्ती कराने की कम संभावना है जिन्हें पहले संक्रमण नहीं हुआ था.

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हालांकि जिन लोगों ने कोरोना का टीकाकरण नहीं कराया है उनमें अस्पताल में भरती होने का खतरा ज्यादा है. इम्पीरियल कॉलेज के प्रोफेसर नील फर्गुसन ने कहा कि हमारा विश्लेषण दिखाता है कि डेल्टा स्वरूप की तुलना में ओमीक्रोन स्वरूप में अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कम है.

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