ePaper

यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्र अब दुनिया के किसी भी देश से कोर्स कर सकेंगे पूरा, एनएमसी ने दी अनुमति

Updated at : 07 Sep 2022 9:23 AM (IST)
विज्ञापन
यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्र अब दुनिया के किसी भी देश से कोर्स कर सकेंगे पूरा, एनएमसी ने दी अनुमति

यूक्रेन से वापस लौटे भारतीय मेडिकल छात्रों को अब दूसरे देशों के विश्वविद्यालयों से भी अपनी पढ़ाई पूरी करने की अनुमति मिलेगी. मौजूदा विशेष परिस्थितियों के मद्देनजर एनएमसी छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने की अनुमति देने के लिए यूक्रेन के अकादमिक गतिशीलता कार्यक्रम को मान्यता देने पर सहमत हो गया है.

विज्ञापन

नई दिल्ली : रूसी सैन्य कार्रवाई का सामना कर रहे यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारत के छात्र अब भारत समेत किसी भी देश से अपना कोर्स पूरा कर सकेंगे. मौजूदा भू-राजनीतिक विशेष परिस्थितियों को देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने 24 फरवरी 2022 से रूस द्वारा यूक्रेन पर शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वापस लौटे भारत के मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने की अनुमति दे दी है. हालांकि, किसी भी देश से कोर्स पूरा करने के बाद इन छात्रों को मेडिकल की डिग्री यूक्रेन के विश्वविद्यालयों की ओर से ही प्रदान की जाएगी.

यूक्रेन के विश्वविद्यालय ही देंगे मेडिकल की डिग्री

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, युद्धग्रस्त यूक्रेन से वापस लौटे भारतीय मेडिकल छात्रों को अब दूसरे देशों के विश्वविद्यालयों में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई पूरी करने की अनुमति मिलेगी. मौजूदा विशेष परिस्थितियों के मद्देनजर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ऐसे छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने की अनुमति देने के लिए यूक्रेन के अकादमिक गतिशीलता कार्यक्रम को मान्यता देने पर सहमत हो गया है, लेकिन डिग्री यूक्रेन के मूल विश्वविद्यालय द्वारा ही प्रदान की जाएगी.

विदेश मंत्रालय की राय पर उठाया गया यह कदम

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग कानून के अनुसार, विदेशी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को केवल एक ही विश्वविद्यालय से डिग्री लेने की आवश्यकता होती है. एनएमसी द्वारा मंगलवार को जारी सार्वजनिक नोटिस में कहा गया है कि गतिशीलता कार्यक्रम संबंधी यूक्रेन की पेशकश पर विदेश मंत्रालय के परामर्श से आयोग में विचार किया गया. यह जानकारी दी गई है कि अकादमिक गतिशीलता कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों में अन्य विश्वविद्यालयों में दाखिला के लिए एक अस्थायी व्यवस्था है. नोटिस में कहा गया है कि डिग्री यूक्रेन के मूल विश्वविद्यालय द्वारा ही प्रदान की जाएगी.

18 अप्रैल को छात्रों ने दिल्ली में किया था प्रदर्शन

गौरतलब है कि यूक्रेन में रूसी हमले शुरू होने के बाद वापस लौटे मेडिकल के छात्रों ने पिछले 18 अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया था. इस प्रदर्शन के दौरान यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्रों ने केंद्र सरकार से राज्य के विश्वविद्यालयों में उनकी पढ़ाई पूरी करने में मदद करने की व्यवस्था करने की मांग की थी. यूक्रेन एमबीबीएस स्टूडेंट्स पैरेंट्स यूनियन के तहत देश भर से लगभग 300 माता-पिता और छात्रों ने सरकार से मांग की कि भारतीय संस्थानों में उनकी शेष शिक्षा पूरी करने के लिए निकासी नामांकन सुनिश्चित किया जाए. मेडिकल छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि सरकार को हमारे बच्चों के करियर को उसी तरह बचाना चाहिए, जैसे उसने छात्रों को यूक्रेन से वापस लाकर उनकी जान बचाई.

Also Read: यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों के दाखिले पर केंद्र और राज्य सरकार में छिड़ा विवाद
यूक्रेन से वापस लौटे से 20 हजार से अधिक मेडिकल के छात्र

युद्धग्रस्त यूक्रेन से वापस लौटे करीब 20,000 से अधिक मेडिकल के छात्रों का करियर दांव पर लगा है. मार्च में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह यूक्रेन से लौटे छात्रों को भारत में अपनी शिक्षा जारी रखने की अनुमति देने के अनुरोध पर विचार कर रही है. वहीं, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने 4 मार्च को जारी एक अधिसूचना में कहा था कि विदेशी मेडिकल स्नातक जिनकी इंटर्नशिप युद्ध जैसी मजबूर स्थितियों के कारण लंबित थी, वे भारत में अपनी इंटर्नशिप के बाकी बचे को पूरा कर सकते हैं, लेकिन ये उनके के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं, जो अपने पाठ्यक्रम के प्रारंभिक वर्षों में हैं.

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola