यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों के दाखिले पर केंद्र और राज्य सरकार में छिड़ा विवाद

ऐसे छात्र जिन्होंने अपनी मेडिकल की डिग्री विदेश में पूरी की है, उन्हें भारत में प्रैक्टिस करने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट देना होता है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार का यह फैसला एनएमसी के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले महीने के अंत में ऐलान किया था कि यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्र, राज्य के मेडिकल कॉलेजों में अपनी पढ़ाई जारी कर सकते हैं. उनकी इस घोषणा के के बाद 412 छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सीटे आवंटित की गयीं.
फिलहाल, इनमें से 172 ऐसे छात्रों को सीटें दी गयी हैं, जो यूक्रेन में दूसरे और तीसरे साल की पढ़ाई कर रहे थे. अब इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच एक और विवाद देखने को मिल रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा था कि केंद्र सरकार इन छात्रों की जिम्मेदारी नहीं ले रही है.
जानकारी के मुताबिक, देश के शीर्ष चिकित्सा शिक्षा नियामक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने जो फैसला लिया है, वह नियम के खिलाफ है. एनएमसी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि इस तरह से मेडिकल की शिक्षा पूरी करने वाले छात्र स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं.
गौरतलब है कि ऐसे छात्र जिन्होंने अपनी मेडिकल की डिग्री विदेश में पूरी की है, उन्हें भारत में प्रैक्टिस करने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट देना होता है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार का यह फैसला एनएमसी के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है. नियमों के मुताबिक, विदेश में मेडिकल डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को पहले भारत में व्यावहारिक चिकित्सा शिक्षा पूरी करनी होती है. इसके लिए उन्हें एक मेडिकल कॉलेज में 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी करनी पड़ती है.
एनएमसी के एक अधिकारी का कहना है कि यूक्रेन से आने वाले मेडिकल छात्रों के बारे में अभी तक एनएमसी ने कोई फैसला नहीं लिया है. वर्तमान दिशा-निर्देश बहुत स्पष्ट है. अगर ये छात्र बंगाल में अपनी बची हुई पढ़ाई पूरी करते हैं तो वे फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई) के लिए पात्र नहीं होंगे.
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी भी एनएमसी से सहमत हैं. अधिकारी का कहना है कि केंद्र सरकार ने पहले ही राज्यों को बताया था कि यूक्रेन से लौटे छात्रों के बारे में कोई भी कदम उठाने से पहले केंद्र से पूछे. रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल सरकार ने इसके लिए केंद्र से कोई अनुमति नहीं मांगी थी. अधिकारी ने बताया कि केंद्र ऐसे छात्रों के बारे में सोच रही है और जल्द ही फैसला लेगी.
इस मामले में राज्य सरकार के चिकित्सा निदेशक देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि पहले राज्य में मेडिकल कॉलेजों की सीटों में इजाफा किया गया, फिर उन छात्रों को सीटें आवंटन करने का फैसला किया गया, लिहाजा सीटों में वृद्धि करने के बाद छात्रों को किसी तरह की समस्या नहीं होगी. हालांकि श्री भट्टाचार्य ने एनएमसी के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन पर कुछ नहीं कहा.
गौरतलब है कि यूक्रेन ही नहीं बल्कि चीन, फिलिपिंस और जॉर्जिया जैसे देशों से भी हजारों की तादाद में ऐसे छात्र हैं, जिन्हें यात्रा प्रतिबंधों की वजह से पढ़ाई छोड़नी पड़ी है. एक आंकड़े के मुताबिक, देश में ऐसे छात्रों की संख्या 65 हजार के करीब है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने एनएमसी को निर्देश दिया है कि वह अगले दो महीने में एक ऐसी नीति तैयार करें, ताकि ऐसे छात्र पंजीकरण करवा सकें, जिन्होंने दूसरे देशों में अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर ली है, मगर व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं ले पाये हैं.
प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




