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कोरोना वायरस के नये समूह A3i का पता चला, भारत में 40% से अधिक COVID-19 रोगी इसी clade के

Updated at : 04 Jun 2020 8:09 PM (IST)
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कोरोना वायरस के नये समूह A3i का पता चला, भारत में 40% से अधिक COVID-19 रोगी इसी clade के

कोरोना वायरस का संक्रमण देश में लगातार बढ़ता जा रहा है. अब तक 216919 लोग देश में संक्रमित हो चुके हैं और 6 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इस बीच कोरोना वायरस को लेकर एक नयी खोज देश के वैज्ञानिकों ने की है. हैदराबाद के कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र ने कोरोन वायरस के एक खास समूह की खोज की है. समूह का नाम clade A3i दिया गया है.

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नयी दिल्‍ली : कोरोना वायरस का संक्रमण देश में लगातार बढ़ता जा रहा है. अब तक 216919 लोग देश में संक्रमित हो चुके हैं और 6 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इस बीच कोरोना वायरस को लेकर एक नयी खोज देश के वैज्ञानिकों ने की है. हैदराबाद के कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र ने कोरोन वायरस के एक खास समूह की खोज की है. समूह का नाम clade A3i दिया गया है. वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में 40 प्रतिशत से अधिक COVID-19 रोगी clade A3i समूह से हैं.

कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र के डायरेक्टर राकेश मिश्रा ने बताया, एक अलग clade A3i है जो दक्षिण पूर्व एशिया में प्रमुख है. यह स्ट्रेन चीन से नहीं बल्कि अन्य दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों से आया है. अनुमान है कि यह फरवरी के मध्य में चीन या कहीं और से उत्पन्न हुआ है.

उन्‍होंने आगे बताया, A3i में 4 अलग-अलग म्यूटेशन हैं जिनमें से 3 असल में वायरस में प्रोटीन बदलते हैं. भारत में सभी रोगियों में से 40% से अधिक इस क्लैड के हैं. पहला प्रमुख क्लैड A2a क्लैड है, जो गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य भागों में 50% के करीब है.

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वैज्ञानिकों ने 64 जीनोम का किया अध्‍ययन

वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के 64 जीनोम का अध्‍ययन किया. उन्‍होंने बताया, भारत में कई राज्यों से पूरे जीनोम की उपलब्धता ने हमें भारत में जीनोम के phylogenetic समूहों का विश्लेषण करने के लिए प्रेरित किया. कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र के ट्वीट के अनुसार यह कोरोना वायरस की हालिया जीनोम रिपोर्ट है. अब तक वायरस के इस समूह को पहचाना नहीं जा सका था, जो भारत में फैल रहा है. वायरस का यह समूह कम खतरनाक है या अधिक इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आ पायी है.


फरवरी के मध्य में चीन या कहीं और से उत्पन्न हुआ : डायरेक्टर राकेश मिश्रा

कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र के डायरेक्टर राकेश मिश्रा ने बताया, ऐसा लगता है कि इस समूह की उत्पत्ति फरवरी 2020 में चीन या कहीं और से उत्पन्न हुआ और यह भारत में फैला होगा. सार्स सीओवी2 के भारत के सभी जीनोम नमूनों के 41 प्रतिशत नमूनों में इसकी पुष्टि हुई है और दुनियाभर की बात करें तो 3.2 प्रतिशत नमूनों में यह मिला है.

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