भारत-चीन सीमा विवाद में कूदा नेपाल, जानें क्या कहा...

Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 Jun 2020 5:45 PM

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Nepal is confident that our friendly neighbours India & China will resolve border dispute : भारत-चीन सीमा विवाद के बीच नेपाल ने उम्मीद जतायी है कि उनके दोनों पड़ोसी देश अपनी समस्या का समाधान कर लेंगे. नेपाल सरकार ने कहा है कि दोनों देश एक अच्छे पड़ोसी की तरह अपने आपसी समस्याओं का समाधान कर लेंगे. यह विश्व और क्षेत्रीय शांति की लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

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नयी दिल्ली : भारत-चीन सीमा विवाद के बीच नेपाल ने उम्मीद जतायी है कि उनके दोनों पड़ोसी देश अपनी समस्या का समाधान कर लेंगे. नेपाल सरकार ने कहा है कि दोनों देश एक अच्छे पड़ोसी की तरह अपने आपसी समस्याओं का समाधान कर लेंगे. यह विश्व और क्षेत्रीय शांति की लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

गौरतलब है कि 12 जून को भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल की तरफ से फायरिंग हुई थी और एक व्यक्ति की मौत हुई थी. हालांकि भारत ने हमेशा यह कहा कि भारत और नेपाल के संबंध मधुर हैं और रहेंगे.

गौरतलब है कि लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून को भारत-चीन के सैनिकों की बीच झड़प हुई थी जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे. चीन को भी नुकसान हुआ था. उसके बाद चीन ने ऐसा दावा किया कि भारतीय सेना उसके इलाके में घुस गयी थी.

हालांकि चीन के साथ हुई झड़प में विश्व के कई देशों ने भारतीय सैनिकों के शहीद होने पर संवेदना जतायी. अमेरिका के विदेश मंत्री ने भी भारतीय सैनिकों के परिवार वालों के प्रति संवेदना जतायी थी. अब नेपाल की ओर से भी बयान आया है.

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भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव के बीच आज वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने कहा कि हम किसी भी अचानक हुई घटना का जवाब देने के लिए अच्छी तरह से तैयार और तैनात हैं. मैं देश को विश्वास दिलाता हूं कि हम गलवान के बहादुरों के बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगे. देश और दुनिया से जुड़ी हर Hindi News से अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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