महिलाओं के साथ रेप घटा, घरेलू हिंसा बढ़ी, लॉकडाउन के दौरान प्रवासी महिलाओं के मुद्दे पर चर्चा कर रहा है NCW

NCW discussing the issue of migrant women during lockdown domestic violence increased :कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जारी लॉकडाउन के बीच कुछ खबरें सुकून देने वाली हैं, तो कुछ खबरें चिंता का कारण भ�� बनती हैं. लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूर जिस तरह मीलों चलकर भी अपने गांव पहुंच रहे हैं, इस दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बात अगर महिलाओं की करें, तो उन्हें इस दौरान कई अन्य तरह की परेशानियां भी झेलनी पड़ रही है. कल ही एक खबर आयी थी जिसमें एक प्रवासी मजदूर का प्रसव सड़क पर हुआ और उसके मात्र दो घंटे बाद ही वह अपने नवजात को लेकर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चली.
कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जारी लॉकडाउन के बीच कुछ खबरें सुकून देने वाली हैं, तो कुछ खबरें चिंता का कारण भी बनती हैं. लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूर जिस तरह मीलों चलकर भी अपने गांव पहुंच रहे हैं, इस दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बात अगर महिलाओं की करें, तो उन्हें इस दौरान कई अन्य तरह की परेशानियां भी झेलनी पड़ रही है. कल ही एक खबर आयी थी जिसमें एक प्रवासी मजदूर का प्रसव सड़क पर हुआ और उसके मात्र दो घंटे बाद ही वह अपने नवजात को लेकर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चली. यही कारण है कि राष्ट्रीय महिला आयोग प्रवासी महिलाओं और उनकी स्थिति पर गंभीरता पूर्वक विचार कर रहा है. इसी क्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग ने 22 राज्यों के महिला आयोग की आज बैठक बुलायी और उसमें प्रवासी मजदूरों की स्थिति उनके अपना गांव-शहर छोड़ने के कारणों को जाना. आंकड़ों के अनुसार 15 करोड़ प्रवासी महिला हैं, जो आजीविका और शिक्षा के लिए अपना घर छोड़ बाहर जाती हैं. इस संबंध में जानकारी देते हुए झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि मीटिंग अभी जारी है, शाम तक प्रवासी महिलाओं के मुद्दे पर चर्चा होगी और उसके बाद आयोग इसपर निर्णय करेगा.
गौरतलब है कि लॉकडाउन के दौरान महिलाओं की स्थिति के बारे में रिपोर्ट देते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा था कि लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा की घटनाएं अभूतपूर्व तरीके से बढ़ी हैं. इसका कारण यह है कि घरेलू हिंसा की पीड़िता और आरोपी दोनों घर पर हैं. महिला आयोग के अनुसार फरवरी 27 से मार्च 22 तक महिलाओं के खिलाफ अपराध के 396 मामले दर्ज हुए जबकि मार्च 23 से अप्रैल 16 तक 587 मामले दर्ज हुए. इनमें सबसे ज्यादा मामले घरेलू हिंसा के हैं. घरेलू हिंसा से निपटने और त्वरित कार्रवाई के आयोग ने 72177135372 व्हाट्सएप नंबर जारी किया है.
वहीं एक खबर सुकून देने वाली है कि पूरे देश में लॉकडाउन के दौरान रेप की घटनाओं में कमी आयी है. दिल्ली पुलिस द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार मार्च 22 से अप्रैल 12 तारीख के बीच 2019 में 139 केस सामने आये थे, वहीं इसी अवधि में सिर्फ 23 केस सामने आये. यह मामलों में 83 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि रेप की घटनाओं में कमी का कारण सड़क पर भीड़ का नहीं होना है. लोग में उत्तेजना की कमी हुई है, जिसके कारण यह आंकड़ा सामने आया है. पुरुष महिलाओं के सीधे संपर्क में नहीं आ रहे साथ ही लॉकडाउन के दौरान उनके लिए शराब पीना संभव नहीं हो रहा है, इसलिए भी महिलाएं रेप जैसी घटनाओं की शिकार होने से बच रही हैं. लेकिन घरों में होने वाले रेप पर अभी तक कोई डाटा जारी नहीं हुआ है, क्योंकि ऐसी घटनाएं सामने नहीं आतीं, क्योंकि इन घटनाओं में घरवाले ही आरोपी होते हैं.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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